विश्व का अनुपम आदर्श है श्रीकृष्ण–सुदामा की मित्रता : नीरज शास्त्री

The world's unique role model is the friend of Shri Krishna and Sudama: Neeraj Shastri
 
कथा पीठाधीश्वर अयोध्या के विद्वान मनीषी नीरज शास्त्री ने श्रीकृष्ण के पावन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि गुरुकुल में सांदीपनि ऋषि से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण विश्वामित्र के आह्वान पर मुरलीधर से चक्रधर की भूमिका में अवतरित हुए। उन्होंने द्वारिका में देवी रुक्मणि के साथ विवाह कर दाम्पत्य जीवन की मर्यादा को स्थापित किया। नीरज शास्त्री ने सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन सहपाठी सुदामा को सम्मान देकर और उनकी दरिद्रता को दूर कर विश्व को सच्ची मित्रता का अनुपम आदर्श प्रदान किया। इसके विपरीत उन्होंने द्रुपद और द्रोणाचार्य के प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद द्रुपद की नीति और अहंकार के कारण दोनों के बीच वैर उत्पन्न हुआ, जो अंततः महाभारत युद्ध में विनाश का कारण बना। सुदामा चरित्र के मार्मिक वर्णन को सुनकर श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान लवकुश शास्त्री एवं केशव शास्त्री द्वारा रुक्मणि–कृष्ण विवाह प्रसंग की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें लौकिक रीतियों का सुंदर निर्वहन किया गया। इस अवसर पर दर्शक महिलाओं ने भाव-विभोर होकर नृत्य किया। कार्यक्रम में शिक्षक नेता अजीत सिंह, मोनू सिंह, सूरज सिंह, संतोष कुमार सिंह, कृष्णपाल सिंह, पंकज सिंह सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं व्यापारीगण उपस्थित रहे। कथा की पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे का आयोजन आज किया जाएगा।

बेलसर।   बेलसर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अमित कुमार सिंह उर्फ गोलू सिंह के श्याम सिंह हाता परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्टम एवं सप्तम दिवस पर रुक्मणि–कृष्ण विवाह तथा सुदामा चरित्र का भावपूर्ण और मनोहारी वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रोता भक्ति रस में सराबोर होकर भाव-विभोर हो उठे।

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कथा पीठाधीश्वर अयोध्या के विद्वान मनीषी नीरज शास्त्री ने श्रीकृष्ण के पावन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि गुरुकुल में सांदीपनि ऋषि से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण विश्वामित्र के आह्वान पर मुरलीधर से चक्रधर की भूमिका में अवतरित हुए।

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उन्होंने द्वारिका में देवी रुक्मणि के साथ विवाह कर दाम्पत्य जीवन की मर्यादा को स्थापित किया।नीरज शास्त्री ने सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन सहपाठी सुदामा को सम्मान देकर और उनकी दरिद्रता को दूर कर विश्व को सच्ची मित्रता का अनुपम आदर्श प्रदान किया। इसके विपरीत उन्होंने द्रुपद और द्रोणाचार्य के प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद द्रुपद की नीति और अहंकार के कारण दोनों के बीच वैर उत्पन्न हुआ, जो अंततः महाभारत युद्ध में विनाश का कारण बना।

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सुदामा चरित्र के मार्मिक वर्णन को सुनकर श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान लवकुश शास्त्री एवं केशव शास्त्री द्वारा रुक्मणि–कृष्ण विवाह प्रसंग की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें लौकिक रीतियों का सुंदर निर्वहन किया गया। इस अवसर पर दर्शक महिलाओं ने भाव-विभोर होकर नृत्य किया।
कार्यक्रम में शिक्षक नेता अजीत सिंह, मोनू सिंह, सूरज सिंह, संतोष कुमार सिंह, कृष्णपाल सिंह, पंकज सिंह सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं व्यापारीगण उपस्थित रहे। कथा की पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे का आयोजन आज किया जाएगा।

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