विश्व का अनुपम आदर्श है श्रीकृष्ण–सुदामा की मित्रता : नीरज शास्त्री
बेलसर। बेलसर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अमित कुमार सिंह उर्फ गोलू सिंह के श्याम सिंह हाता परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्टम एवं सप्तम दिवस पर रुक्मणि–कृष्ण विवाह तथा सुदामा चरित्र का भावपूर्ण और मनोहारी वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रोता भक्ति रस में सराबोर होकर भाव-विभोर हो उठे।

कथा पीठाधीश्वर अयोध्या के विद्वान मनीषी नीरज शास्त्री ने श्रीकृष्ण के पावन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि गुरुकुल में सांदीपनि ऋषि से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण विश्वामित्र के आह्वान पर मुरलीधर से चक्रधर की भूमिका में अवतरित हुए।

उन्होंने द्वारिका में देवी रुक्मणि के साथ विवाह कर दाम्पत्य जीवन की मर्यादा को स्थापित किया।नीरज शास्त्री ने सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन सहपाठी सुदामा को सम्मान देकर और उनकी दरिद्रता को दूर कर विश्व को सच्ची मित्रता का अनुपम आदर्श प्रदान किया। इसके विपरीत उन्होंने द्रुपद और द्रोणाचार्य के प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद द्रुपद की नीति और अहंकार के कारण दोनों के बीच वैर उत्पन्न हुआ, जो अंततः महाभारत युद्ध में विनाश का कारण बना।
