परिवार में संस्कारों की नींव रखती है श्रीमद्भागवत कथा – नीरज शास्त्री

कथा का शुभारंभ अयोध्या से पधारे वैदिक विद्वान एवं युवा कथा प्रवाचक नीरज दास शास्त्री ने मंगलाचरण के साथ किया। उन्होंने भागवत महात्म्य का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि परिवार और समाज को संस्कारवान बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

कथा व्यास ने धुंधली और धुंधकारी की प्रसंगात्मक कथा के माध्यम से बताया कि जब माता-पिता बच्चों को उचित संस्कार और अनुशासन नहीं देते, तो उसका दुष्परिणाम पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नि:संतान ब्राह्मण की पत्नी धुंधली द्वारा पुत्र को उचित संस्कार न देने के कारण धुंधकारी का जीवन दुराचार की ओर चला गया, जिससे उसे अकाल मृत्यु और प्रेतयोनि का दुखद परिणाम झेलना पड़ा।

नीरज शास्त्री ने श्रोताओं से आह्वान किया कि वे सनातन धर्म में आस्था रखते हुए अपनी संतानों को संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से दीक्षित करें, ताकि समाज सशक्त और संस्कारित बन सके।कथा आयोजन में पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं शिक्षक नेता अजीत सिंह, मोनू सिंह, सूरज सिंह, संतोष कुमार सिंह, कृष्णपाल सिंह, पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में नगरवासी और व्यापारी वर्ग के लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण बना रहा।
