सिंहस्थ 2028: क्या 40 करोड़ श्रद्धालुओं के बीच स्थानीय तापमान और कार्बन उत्सर्जन बनेगा बड़ी चुनौती?
(प्रहलाद शर्मा - विनायक फीचर्स)
मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन में होने वाले 'सिंहस्थ 2028' को विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम के रूप में भव्य बनाने की तैयारी में जुटी है। 27 मार्च से 27 मई 2028 तक चलने वाले इस 60 दिवसीय महापर्व में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। सरकार ने इसके लिए हजारों करोड़ का बजट आवंटित किया है और निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। लेकिन, इन भव्य तैयारियों के बीच एक अत्यंत संवेदनशील विषय की अनदेखी नहीं की जा सकती—पर्यावरण प्रदूषण और बढ़ता स्थानीय तापमान।
उज्जैन की चुनौती: अन्य कुंभ स्थलों से कठिन परिस्थितियाँ
उज्जैन का सिंहस्थ अन्य तीन कुंभ स्थलों (हरिद्वार, प्रयागराज और नासिक) की तुलना में पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक चुनौतीपूर्ण है। इसका कारण यहाँ की भौगोलिक स्थिति और मौसम है:
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तापमान का अंतर: हरिद्वार कुंभ अप्रैल में होता है जहाँ तापमान 18-35°C रहता है। प्रयागराज का कुंभ सर्दियों (जनवरी-फरवरी) में होता है, जबकि नासिक कुंभ मानूसन के दौरान होता है। इसके विपरीत, उज्जैन का सिंहस्थ प्रचंड गर्मी (अप्रैल-मई) में होगा, जब यहाँ का तापमान सामान्यतः 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है।
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वन क्षेत्र का अभाव: हरिद्वार और नासिक के पास विशाल वन क्षेत्र हैं। प्रयागराज ने शहर के भीतर ही सघन वन विकसित किए हैं। वहीं, उज्जैन जिले में वन क्षेत्र मात्र 0.59% है, जो शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति और कार्बन अवशोषण के लिए नगण्य है।
कार्बन उत्सर्जन: चार बड़े कारकों का गणित
अनुमानों के अनुसार, 60 दिनों के भीतर लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होगा, जिसे अवशोषित करने का फिलहाल कोई ठोस प्राकृतिक तंत्र उज्जैन में उपलब्ध नहीं है। मुख्य उत्सर्जक इस प्रकार होंगे:
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मानवीय श्वसन: 40 करोड़ श्रद्धालुओं के श्वसन से लगभग 6.50 लाख टन कार्बन उत्सर्जन होगा।
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भोजन व्यवस्था: श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में न्यूनतम 1.50 लाख टन कार्बन उत्सर्जित होने का अनुमान है।
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यातायात: वाहनों के आवागमन से 60 दिनों में करीब 2.19 लाख टन कार्बन पर्यावरण में घुलेगा।
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विद्युत खपत: प्रयागराज के आंकड़ों को आधार मानें तो बिजली की भारी खपत से हजारों टन अतिरिक्त कार्बन का बोझ बढ़ेगा।
समाधान: वृक्षारोपण ही एकमात्र 'नेचुरल ऑक्सीजन प्लांट'
सरकार 'स्वच्छ सिंहस्थ' के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की योजना बना रही है, जिसमें प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन शामिल है। लेकिन, 'लोकल वार्मिंग' और कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करने के लिए केवल सफाई काफी नहीं है। इसके लिए सघन वृक्षारोपण को तत्काल धरातल पर उतारना होगा।
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समय रहते शुरुआत: यदि अभी से बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाते हैं, तो 2028 तक वे 'शिशु अवस्था' में पहुँचकर प्रति पौधा 5-10 किलो कार्बन सोखने के काबिल हो जाएंगे।
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स्थायी ऑक्सीजन प्लांट: जिस तरह सरकार स्थायी 'सिंहस्थ सिटी' बना रही है, उसी तरह इन वृक्षों को भविष्य के लिए 'स्थायी ऑक्सीजन प्लांट' के रूप में विकसित करना चाहिए।
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आर्थिक लाभ: ये वृक्ष न केवल तापमान नियंत्रित करेंगे, बल्कि आने वाले दशकों तक सरकार को कार्बन क्रेडिट के माध्यम से करोड़ों की आय भी प्रदान करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार के पास इस महाकुंभ के माध्यम से विश्व पटल पर पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश देने का अवसर है। सिंहस्थ 2028 को केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति और भावी पीढ़ियों के संरक्षण का संदेशवाहक बनाना समय की मांग है। इसके लिए कचरा प्रबंधन के साथ-साथ सघन वनीकरण को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

