राज्यानुदानित मदरसा शिक्षकों की छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न, आधुनिक शिक्षण पर दिया गया जोर

Six-day training workshop for state-aided madrasa teachers concludes; emphasis placed on modern teaching methods.
 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से लखनऊ जनपद के राज्यानुदानित मदरसों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हुआ। "शिक्षक आचरण, कक्षा प्रबंधन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा" विषय पर आयोजित इस कार्यशाला के अंतिम दिन शिक्षा में आधुनिक तकनीक, शिक्षक के व्यवहार और छात्रों के समग्र विकास पर विशेष चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एच.पी. अंबेडकर, संयुक्त निदेशक आर.पी. सिंह, उप निदेशक जगमोहन तथा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने प्रतिभाग किया। अतिथियों का स्वागत इरम एजुकेशनल सोसाइटी के प्रबंधक डॉ. ख्वाजा बज्मी यूनुस और निदेशक के.एस. फैजी यूनुस ने किया।


संयुक्त निदेशक एच.पी. अंबेडकर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप मदरसा शिक्षा को आधुनिक तकनीकों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे नवाचारों से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक तभी सफल माना जाएगा, जब विद्यार्थी उसकी बात को सहजता से समझकर आत्मसात कर सकें। इसके लिए शिक्षकों को स्वयं भी निरंतर सीखने और समय के साथ स्वयं को अपडेट रखने की जरूरत है।


उप निदेशक जगमोहन ने कहा कि आने वाले वर्षों में शिक्षा जगत में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को औपचारिकता नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ कदम मिलाने का प्रभावी माध्यम समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यपुस्तक की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं जीवनोपयोगी ज्ञान प्रदान करना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने वाली प्रशिक्षक सहर सुल्तान और जरीन अब्बास की सराहना करते हुए इरम एजुकेशनल सोसाइटी के सफल आयोजन की भी प्रशंसा की।


संयुक्त निदेशक आर.पी. सिंह ने कहा कि प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों में सीखने की क्षमता अत्यंत तीव्र होती है। ऐसे में शिक्षक का व्यवहार, भाषा, पहनावा और कार्यशैली बच्चों पर गहरा प्रभाव डालती है। उन्होंने शिक्षकों को प्रोजेक्ट आधारित और प्रायोगिक शिक्षण पद्धति अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि छात्र व्यावहारिक अनुभवों से अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं।


जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने सुझाव दिया कि मदरसा शिक्षकों के लिए वर्ष में कम से कम तीन बार एक-एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि वे नई शैक्षिक अवधारणाओं और तकनीकों से लगातार परिचित रह सकें।


इस अवसर पर डॉ. बज्मी यूनुस ने मदरसा छात्रों को भी बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यार्थियों की तरह खेलकूद एवं अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी, जिससे उनकी प्रतिभा को व्यापक मंच मिल सके। कार्यक्रम के अंत में निदेशक के.एस. फैजी यूनुस ने सभी अतिथियों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।


कार्यशाला के पहले सत्र में प्रशिक्षक सहर सुल्तान ने शिक्षकों को मर्यादित भाषा और सकारात्मक व्यवहार के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े POCSO Act, 2012 तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लागू POSH Act, 2013 की जानकारी देते हुए इनके पालन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही मदरसा शिक्षा पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी दिया।


प्रशिक्षक जरीन अब्बास ने कक्षा प्रबंधन, शिक्षण वातावरण को प्रभावी बनाने तथा पाठ्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में जनपद के विभिन्न राज्यानुदानित मदरसों के आलिया स्तर के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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