मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर बना आमजन की परेशानी का कारण, बढ़ता विरोध सरकार के लिए बन सकता है सिरदर्द
(रिपोर्ट: पवन वर्मा | विनायक फीचर्स) मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर अब सुविधा की बजाय परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। विशेषकर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। उदाहरण के तौर पर विदिशा जिले के गुलाबगंज की एक विधवा महिला, जो अपने पांच बच्चों के साथ पन्नी और कबेलू से बने एक कमरे के कच्चे घर में रहती है, अब 7,300 रुपये के बिजली बिल से जूझ रही है—जबकि पहले उनका बिल महज 100 से 150 रुपये तक आता था।
यह मामला विदिशा भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज कटारे ने फेसबुक पर उठाया। वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता अरुण अवस्थी ने स्मार्ट मीटरों को "खुली लूट" करार देते हुए कहा कि गरीबों को रोजमर्रा के भोजन और बिजली बिल के बीच चयन करना पड़ रहा है।
राज्यव्यापी संकट
यह समस्या सिर्फ विदिशा तक सीमित नहीं है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, सतना, रीवा, सीहोर, बुरहानपुर जैसे बड़े और छोटे शहरों में भी स्मार्ट मीटरों के कारण बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर विरोध हो रहा है। कई इलाकों में लोग मीटर लगवाने से साफ इनकार कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर तो विरोध के चलते इंस्टॉलेशन कार्य तक रोक दिए गए हैं।भोपाल में कांग्रेस ने दावा किया है कि महज़ 508 उपभोक्ताओं को 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के बिल थमा दिए गए हैं। इसे लेकर पार्टी ने धरना प्रदर्शन भी किया।
शिकायतें, लेकिन समाधान नहीं
उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटरों में बिजली खपत पहले के मुकाबले दोगुनी-तिगुनी दिख रही है। बिजली विभाग के दफ्तरों में शिकायतों का अंबार है, लेकिन समाधान ना के बराबर है। टोल फ्री नंबर 1912, ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी माध्यम से की गई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही। उल्टा समय पर बिल जमा न करने पर बिना सूचना के बिजली काट दी जाती है।
राजनीति और जन आंदोलन
इस बार जनता का विरोध गैर-राजनीतिक स्वरूप लेता दिख रहा है। जगह-जगह बिना किसी पार्टी झंडे के प्रदर्शन हो रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता जनता के बीच जाकर समर्थन दे रहे हैं। विधानसभा के मानसून सत्र में उज्जैन के कांग्रेस विधायक महेश परमार ने स्मार्ट मीटरों की शिकायतें सदन में उठाई थीं, लेकिन फिलहाल सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
सरकार की योजना और हकीकत
देश भर में केंद्र सरकार की योजना के तहत 25 करोड़ पारंपरिक मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाना है। अब तक करीब 11.5 करोड़ मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि इससे 2031-32 तक 11 लाख करोड़ रुपये का राजस्व घाटा रोका जा सकेगा। लेकिन मध्य प्रदेश में जिस तरह से जनता प्रतिक्रिया दे रही है, वह इस योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है।
कांग्रेस क्यों नहीं बना सकी इसे बड़ा मुद्दा?
हालांकि विपक्ष को यह मुद्दा सशक्त राजनीतिक हथियार बन सकता था, लेकिन अब तक कांग्रेस इसे राज्य स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन नहीं बना सकी है। अधिकांश बड़े नेता सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर लोग आंदोलन कर रहे हैं।
