स्मार्ट प्री-पेड मीटर का 'करंट': उपभोक्ताओं की समस्याओं पर ग्रेटर लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
बिना सहमति मीटर बदलने और भारी बिलों का आरोप
महासमिति के अध्यक्ष रूप कुमार शर्मा और महासचिव विवेक शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को भेजे पत्र में बताया कि पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
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अचानक बढ़ा बिल: उपभोक्ताओं का आरोप है कि प्री-पेड मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे मीटर की सटीकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सॉफ्टवेयर की खामियां: पर्याप्त बैलेंस होने के बावजूद सॉफ्टवेयर की खराबी के कारण अचानक बिजली कट जाती है और घंटों बहाल नहीं होती, जिससे जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महासमिति की प्रमुख माँगें
ग्रेटर लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने सरकार के सामने निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
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निष्पक्ष जाँच: स्मार्ट मीटर के सॉफ्टवेयर और बिलिंग प्रणाली की किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी से पारदर्शी तकनीकी जाँच कराई जाए।
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उपभोक्ता की सहमति: किसी भी घर पर स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाने से पूर्व उपभोक्ता की लिखित सहमति अनिवार्य की जाए।
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हर्जाना और कार्रवाई: यदि रिचार्ज के बाद निर्धारित समय में बिजली चालू नहीं होती, तो संबंधित डिस्कॉम पर दंडात्मक कार्रवाई हो और उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति (Compensation) दी जाए।
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प्रक्रिया पर रोक: फिलहाल प्रदेश में स्मार्ट मीटर को प्री-पेड में बदलने की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
कंट्रोल रूम स्थापित करने का सुझाव
भीषण गर्मी को देखते हुए महासमिति ने जिला स्तर पर विशेष 'स्मार्ट मीटर कंट्रोल रूम' स्थापित करने की मांग की है ताकि शिकायतों का तुरंत निस्तारण हो सके। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा और यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशिष गोयल को भी विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है।
