संविधान की रक्षा के लिए समाजवादियों ने दी कुर्बानी : अरविंद कुमार सिंह गोप
बाराबंकी। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान सामाजिक समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सबसे बड़ा आधार है। संविधान ही देश को जोड़ने और समाज के वंचित वर्गों को सम्मान दिलाने का कार्य कर रहा है। इसकी रक्षा करना प्रत्येक भारतीय नागरिक का दायित्व है।
यह विचार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार सिंह गोप ने सोमवार को साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ‘उर्दू कबीला’ के तत्वावधान में आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मान संगोष्ठी में व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अरविंद कुमार सिंह गोप ने कहा कि संविधान एक ऐसा अहिंसक हथियार है, जिसने पूरी दुनिया में पीडीए समाज को बराबरी और सम्मान दिलाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा हमेशा संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है।

उन्होंने अखिलेश यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब संविधान बचाने की बात उठी, तब समाजवादियों ने इसके संरक्षण के लिए हर प्रकार की कुर्बानी देने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव सहित अनेक समाजवादी नेताओं ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
कार्यक्रम में उर्दू कबीला संस्था के संस्थापक फजल इनाम मदनी और मोहम्मद हारिस को बधाई देते हुए गोप ने कहा कि संस्था बाराबंकी की साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। संस्था हिंदी और उर्दू साहित्य, शायरी तथा गद्य का विशाल संग्रह निःशुल्क उपलब्ध कराकर भाषाई ज्ञान के विस्तार में योगदान दे रही है।
इस अवसर पर साहित्यवेत्ता फजल इनाम मदनी, अक्षत शुक्ला और सैयद मोहम्मद हारिस ने Ambedkar: A Life तथा भारतीय संविधान की प्रति अरविंद कुमार सिंह गोप को भेंट की।

कार्यक्रम में लेखक-पत्रकार पाटेश्वरी प्रसाद, धीरेंद्र कुमार वर्मा, जमीर सिद्दीकी, सुरेश चंद्र गौतम, अजय कुमार वर्मा, ज्ञान सिंह यादव, तारिक जिलानी, हसमत अली और वीरेन्द्र प्रधान को अंगवस्त्र एवं स्वामी विवेकानंद तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन पर आधारित पुस्तकों से सम्मानित किया गया।
संस्था की ओर से यह भी घोषणा की गई कि आगामी अक्टूबर माह में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन पर केंद्रित एक भव्य संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। साथ ही उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तकों का विद्यालयों में निःशुल्क वितरण भी किया जाएगा।
