सोलर स्मार्ट सिटी लखनऊ: 'हरित क्रांति' का नया केंद्र बनी नवाबों की नगरी; 10 वर्षों में आया ऐतिहासिक बदलाव

Solar Smart City Lucknow: The 'City of Nawabs' Emerges as a New Hub of the 'Green Revolution'; A Historic Transformation Over 10 Years
 
Solar Smart City Lucknow: The 'City of Nawabs' Emerges as a New Hub of the 'Green Revolution'; A Historic Transformation Over 10 Years

लेखक: प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह (साभार: ओपिनियन डेस्क)

भूमिका: आज संपूर्ण वैश्विक समुदाय ऊर्जा संकट, अनियंत्रित जलवायु परिवर्तन और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रहा है। इस नाजुक दौर में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), विशेष रूप से सौर ऊर्जा, मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य के लिए एक वरदान साबित हो रही है। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों ने इस क्षेत्र में एक मूक क्रांति को जन्म दिया है। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज देश के प्रमुख 'सोलर शहरों' में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना चुकी है। लखनऊ का यह सौर रूपांतरण वास्तव में एक नई 'हरित क्रांति' का जीवंत शंखनाद है।

📊 आंकड़ों की जुबानी: लखनऊ और उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा का महा-उछाल

लखनऊ जिले में रूफटॉप सोलर का विस्तार किसी चमत्कार से कम नहीं है। यदि हम इसके विकास के आंकड़ों पर नजर डालें, तो प्रगति की रफ्तार हैरान करने वाली है:

  • अक्टूबर 2025 तक की स्थिति: लखनऊ जिले में लगभग 4,271 रूफटॉप सोलर संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके थे।

  • अप्रैल 2026 तक ऐतिहासिक छलांग: मात्र कुछ ही महीनों के भीतर यह संख्या तेजी से बढ़कर 87,000 से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन तक पहुँच गई, जिसने लखनऊ को देश के शीर्ष सौर जिलों की कतार में ला खड़ा किया।

  • शीर्ष 10 में स्थान: अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच लखनऊ, उत्तर प्रदेश के उन टॉप-10 जिलों में शुमार रहा, जहाँ सबसे ज्यादा नए सोलर प्लांट लगाए गए।

उत्तर प्रदेश का गौरवमयी रिकॉर्ड: केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि पूरे सूबे ने इस क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में 3 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लग चुके थे, जो मार्च 2026 तक बढ़कर लगभग 4.48 लाख के आंकड़े को छू गए। इसके साथ ही राज्य की कुल रूफटॉप सौर क्षमता 1,524 मेगावाट (MW) को पार कर गई है।

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🏡 व्यक्तिगत अनुभव: जब लखनऊ को मिला अपना 'पहला नेट-मीटर'

"मेरे लिए सौर ऊर्जा केवल एक तकनीकी विषय या प्रशासनिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।"

साल 2015 में जब उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी 'अक्टूबर 2015 की सोलर पॉलिसी' जारी की, तभी मुझे यह आभास हो गया था कि भविष्य की अनियंत्रित आबादी और बिजली की खपत का एकमात्र व्यावहारिक समाधान सौर ऊर्जा ही है। इसी सोच के साथ मैंने अपने निजी आवास पर 5 किलोवाट (kW) क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करवाया, जिसे गुरुग्राम की एक प्रतिष्ठित सोलर फर्म ने लगाया था। उस दौर में लखनऊ के लिए यह एक बिल्कुल नया प्रयोग था और मुझे गर्व है कि मुझे शहर का पहला नेट-मीटर लगवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

उस शुरुआती दौर में आम जनमानस में सौर ऊर्जा को लेकर जागरूकता का भारी अभाव था। लोगों को यह समझाना और विश्वास दिलाना बेहद मुश्किल था कि छत पर लगे ये पैनल न केवल भारी-भरकम बिजली बिल से मुक्ति दिलाएंगे, बल्कि बची हुई बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई का जरिया भी बनेंगे। लेकिन मेरा यह दृढ़ विश्वास था कि आने वाले समय में यही तकनीक शहरी आत्मनिर्भरता की रीढ़ बनेगी।

🔮 15 लाख घर और 4,500 मेगावाट का विराट सपना

जिस तेजी से लखनऊ का शहरीकरण हो रहा है, आने वाले समय में यह 50 से 60 लाख की आबादी वाला एक विशाल महानगर बनने की ओर अग्रसर है। तब यहाँ कम से कम 15 लाख आवासीय मकान होंगे। मेरा सपना है कि यदि प्रत्येक घर की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो जाए, तो अकेले लखनऊ शहर से 4,500 मेगावाट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। वर्तमान की अभूतपूर्व रफ्तार को देखकर अब यह सपना हकीकत के बेहद करीब नजर आता है।

मैंने इस तकनीक के प्रति जन-जागरूकता को अपना मिशन बनाया और विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों, तकनीकी कार्यशालाओं और शैक्षणिक सम्मेलनों के माध्यम से समाज में 'हरित विकास' (Green Development) की सोच को विकसित करने का प्रयास किया।

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🏫 'स्कूल ऑफ़ MANAGEMENT साइंसेस' (SMS): शत-प्रतिशत हरित मॉडल

आज मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता होती है कि स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेस, लखनऊ, जहाँ मैं महानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा हूँ, सौर ऊर्जा का एक अनुकरणीय मॉडल बन चुका है। हमारे संस्थान परिसर की छत पर 275 किलोवाट (kW) क्षमता का विशाल रूफटॉप सोलर प्लांट सक्रिय है। हम पूरे संस्थान को शत-प्रतिशत हरित ऊर्जा (Green Energy) पर संचालित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जो हमारी भावी पीढ़ी के लिए एक महान प्रेरणा है।

📜 नीतिगत सुधार और विकास के तीन चरण

लखनऊ की इस सौर सफलता के पीछे पिछले 10 वर्षों के नीतिगत सुधारों का एक बड़ा ढांचा है, जिसे तीन चरणों में समझा जा सकता है:

  1. प्रथम चरण (2015-2019): इस दौरान विकास की गति धीमी रही, क्योंकि तकनीकी लागत अधिक थी और उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी थी। हालांकि, "उत्तर प्रदेश नेट मीटरिंग रेगुलेशन 2019" के आने से उपभोक्ताओं का ग्रिड पर भरोसा बढ़ा।

  2. द्वितीय चरण (2020-2022): इस कालखंड में "उत्तर प्रदेश सोलर एनर्जी पॉलिसी 2022" लागू हुई, जिसके बाद सरकारी विभागों, यूनिवर्सिटीज और व्यावसायिक इमारतों में सोलर का उपयोग तेजी से बढ़ा।

  3. तृतीय चरण (2023 के बाद - वर्तमान): केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना', डायरेक्ट सब्सिडी ट्रांसफर (DBT) और अत्यंत सरल ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के कारण इस योजना ने एक जन-आंदोलन का रूप ले लिया और आवासीय (Residential) क्षेत्रों में सोलर इंस्टॉलेशन की बाढ़ आ गई।

आज का लखनऊ स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) का एक वैश्विक रोल मॉडल बनने की राह पर है। रूफटॉप सोलर ने आम आदमी को महंगे बिजली बिलों से राहत दी है, पर्यावरण को कार्बन उत्सर्जन से बचाया है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में लखनऊ देश के पटल पर एक "सोलर स्मार्ट सिटी" के रूप में जगमगाएगा और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में 'विश्व गुरु' बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

उत्तर प्रदेश में रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले एक दशक में राज्य के भीतर घरों और प्रतिष्ठानों की छतों पर सोलर पैनल लगाने (सोलर रूफटॉप) के चलन में अभूतपूर्व तेजी आई है। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां साल 2015-16 में राज्य की नई सौर क्षमता महज 500 किलोवाट (kW) थी, वहीं साल 2025-26 तक आते-आते यह बढ़कर कुल 2,99,500 किलोवाट (kW) के पार पहुँच चुकी है।

📊 वर्षवार सोलर रूफटॉप क्षमता विकास की स्थिति (kW में)

नीचे दी गई तालिका दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में हर साल कितनी नई क्षमता जुड़ी और कुल स्थापना का आंकड़ा कहाँ तक पहुँचा:

वित्तीय वर्ष नया जुड़ाव (Annual Addition) कुल स्थापित क्षमता (Cumulative Total)
2015-16 500 kW 500 kW
2016-17 1,000 kW 1,500 kW
2017-18 2,000 kW 3,500 kW
2018-19 4,000 kW 7,500 kW
2019-20 6,000 kW 13,500 kW
2020-21 10,000 kW 23,500 kW
2021-22 18,000 kW 41,500 kW
2022-23 28,000 kW 69,500 kW
2023-24 45,000 kW 1,14,500 kW
2024-25 75,000 kW 1,89,500 kW
2025-26 1,10,000 kW 2,99,500 kW

📈 विकास यात्रा के मुख्य पड़ाव: शुरुआती मंदी से ऐतिहासिक उछाल तक

1. 2015 से 2019: धीमी शुरुआत का दौर शुरुआती वर्षों (2015-2019) के दौरान प्रदेश में सोलर रूफटॉप की रफ्तार काफी धीमी रही। इसका मुख्य कारण आम जनता के बीच सौर ऊर्जा को लेकर सीमित जागरूकता और सरकारी सब्सिडी योजनाओं की जमीनी स्तर पर कम पहुँच होना था।

2. इन तीन प्रमुख नीतियों ने बदली मालवा और यूपी की तस्वीर साल 2019 के बाद केंद्र और राज्य सरकार के कुछ बड़े नीतिगत फैसलों ने इस सेक्टर को नए पंख दिए:

  • यूपी नेट मीटरिंग विनियम 2019: इसके लागू होने से उपभोक्ताओं के लिए ग्रिड से बिजली का आदान-प्रदान आसान हुआ।

  • उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022: राज्य सरकार की इस समर्पित नीति ने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया।

  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना ने वित्तीय मदद (सब्सिडी) को सीधे जनता तक पहुँचाकर रूफटॉप सोलर को एक जन-आंदोलन में बदल दिया।

🎯 मेगावाट (MW) के स्तर पर उत्तर प्रदेश के संदर्भ आंकड़े

  • प्रारंभिक दौर की स्थिति: शुरुआती क्रियान्वयन के वर्षों में उत्तर प्रदेश के भीतर ग्रिड से जुड़ी कुल रूफटॉप सोलर क्षमता केवल 265 मेगावाट (MW) के आसपास सिमटी हुई थी।

  • ऐतिहासिक मील के पत्थर: नीतियों में सुधार के बाद उत्तर प्रदेश ने सौर क्षमता के मामले में नए रिकॉर्ड बनाए:

    • वर्ष 2025 में राज्य ने 1,038 मेगावाट का आंकड़ा पार किया।

    • वर्ष 2026 में यह क्षमता और तेजी से बढ़ते हुए 1,524 मेगावाट के स्तर को पार कर गई।

🔮 भविष्य का बड़ा लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार अपनी 'सौर ऊर्जा नीति 2022' के तहत एक बहुत बड़े विजन पर काम कर रही है। इस नीति के अंतर्गत राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरे उत्तर प्रदेश में 22,000 मेगावाट (MW) कुल सौर ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है। जिस रफ्तार से वर्तमान में घरों की छतों पर सोलर पैनल लग रहे हैं, उसे देखते हुए यह लक्ष्य बेहद करीब नजर आ रहा है।

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