पिता की जिंदगी बचाने के लिए बेटे ने चार महीने में घटाया 20 किलो वजन, अपोलोमेडिक्स में सफल लिवर ट्रांसप्लांट
लखनऊ डेस्क (आर एल पाण्डेय)। पिता की जिंदगी बचाने के संकल्प ने एक बेटे को अपनी सेहत बदलने की प्रेरणा दी। लखनऊ के अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने लिवर सिरोसिस से जूझ रहे एक मरीज का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया। मरीज के 24 वर्षीय बेटे ने करीब चार महीने में 20 किलो वजन घटाकर अपने लिवर को दान के लिए उपयुक्त बनाया और पिता को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंकुश सिंह (बदला हुआ नाम) लंबे समय से लिवर सिरोसिस की गंभीर स्थिति से जूझ रहे थे। उनकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। परिवार में कोई अन्य उपयुक्त डोनर नहीं मिल रहा था। ऐसे में उनके बेटे ने लिवर दान करने की इच्छा जताई। हालांकि, शुरुआती जांच में बेटे का वजन 90 किलो से अधिक पाया गया और उसके लिवर में ग्रेड-3 से भी अधिक फैट जमा होने का पता चला। इस स्थिति में उसे लिवर डोनेशन के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।
परिवार के सामने चुनौती गंभीर थी। दूसरे संभावित डोनर की तलाश के बावजूद कोई उपयुक्त विकल्प नहीं मिला। इसके बाद बेटे ने डॉक्टरों की सलाह पर अपनी जीवनशैली में बदलाव करने और सेहत सुधारने का निर्णय लिया। विशेष डाइट, नियमित फॉलोअप और चिकित्सकीय निगरानी के जरिए उसने लगभग चार महीने में 20 किलो वजन कम किया। इसके बाद दोबारा किए गए विस्तृत मूल्यांकन में उसके लिवर की स्थिति में सुधार पाया गया और उसे डोनर के रूप में उपयुक्त माना गया।
बिना इंजेक्शन या दवा के घटाया वजन
डॉक्टरों के अनुसार, बेटे ने वजन कम करने के लिए किसी इंजेक्शन या दवा का सहारा नहीं लिया। उसने विशेष आहार योजना, नियमित जांच और चिकित्सकीय निगरानी के जरिए यह बदलाव हासिल किया। लिवर में फैट की मात्रा और उपचार के असर का आकलन करने के लिए चार से पांच बार एमआरआई जांच भी की गई।
लिवर की स्थिति में सुधार के बाद डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें सातवें-आठवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस मामले में बेटे की जांच के दौरान फैटी लिवर का पता चलना भी महत्वपूर्ण रहा। डॉक्टरों के मुताबिक, समय रहते इस समस्या की पहचान होने से उसे अपनी सेहत सुधारने का अवसर मिला। यदि फैटी लिवर की समस्या का पता नहीं चलता और वह लगातार बढ़ती रहती, तो भविष्य में गंभीर लिवर रोग का खतरा हो सकता था।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया प्रत्यारोपण
अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ में यह लिवर ट्रांसप्लांट हेड लिवर ट्रांसप्लांट डॉ. अभिषेक यादव और लिवर ट्रांसप्लांट कंसल्टेंट डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ किया।
डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि मरीज करीब छह महीने पहले लिवर सिरोसिस की गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे थे। उन्हें तत्काल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी। परिवार में उनका बेटा ब्लड ग्रुप के लिहाज से संभावित मैचिंग डोनर था, लेकिन शुरुआती चिकित्सकीय मूल्यांकन में उसके लिवर में अत्यधिक फैट पाया गया। इसलिए उस समय उसे डोनर के रूप में स्वीकार करना संभव नहीं था।
उन्होंने बताया कि दूसरे संभावित डोनर की तलाश के बावजूद कोई उपयुक्त विकल्प नहीं मिलने पर बेटे ने डॉक्टरों की सलाह के अनुसार विशेष डाइट अपनाई और नियमित फॉलोअप शुरू किया। लगातार जांच के जरिए उसके लिवर की स्थिति पर नजर रखी गई। करीब चार महीने में 20 किलो वजन कम करने के बाद उसका दोबारा मूल्यांकन किया गया, जिसमें वह लिवर दान के लिए उपयुक्त पाया गया।
डॉ. यादव ने कहा, “बेटे ने अपने पिता की जान बचाने के लिए जिस तरह मेहनत की, वह काबिले तारीफ है। उसे खुद पता नहीं था कि उसके लिवर में इतना फैट जमा है। पिता को लिवर दान करने के लिए जब वह हमारे पास आया, तब जांच में इस बीमारी का पता चला। अगर समय रहते इसका पता नहीं चलता, तो आने वाले वर्षों में उसे भी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती थी। अंगदान किसी की जिंदगी बचाने का जरिया है, लेकिन इसके लिए डोनर का स्वस्थ होना भी उतना ही जरूरी है। इस मामले में हमने बेटे की सेहत में सुधार के साथ यह भी सुनिश्चित किया कि वह सुरक्षित रूप से लिवर दान करने के योग्य हो।”
फैटी लिवर को नजरअंदाज करना हो सकता है नुकसानदायक
डॉक्टरों के अनुसार, फैटी लिवर की समस्या शुरुआती चरण में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के रहती है। कुछ मरीजों में समय के साथ लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार, वजन पर नियंत्रण, नियमित शारीरिक गतिविधि और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण हैं।
यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि अंगदान की प्रक्रिया में संभावित डोनर की सेहत का विस्तृत मूल्यांकन बेहद जरूरी होता है। किसी की मदद करने की इच्छा के साथ डोनर की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी चिकित्सा टीम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अंगदान से किसी परिवार को मिल सकती है नई उम्मीद
अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के सीईओ एवं एमडी डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, “इस मामले में बेटे ने अपने पिता की जान बचाने के लिए खुद को स्वस्थ बनाने की ठानी और लगातार मेहनत की। हमारे डॉक्टरों की टीम ने उसकी सेहत में सुधार से लेकर लिवर ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाए जाने तक हर चरण पर बारीकी से निगरानी की। अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी है, क्योंकि एक व्यक्ति का अंगदान किसी दूसरे को नई जिंदगी दे सकता है और पूरे परिवार की उम्मीदें फिर से जगा सकता है।”
पिता के लिए बेटे का यह प्रयास चिकित्सा विशेषज्ञता, पारिवारिक समर्पण और समय पर बीमारी की पहचान के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही, यह संदेश देता है कि अंगदान में भावनात्मक संकल्प के साथ डोनर की सुरक्षा और चिकित्सकीय मानकों का पालन भी अनिवार्य है।
