बेटे ने इंग्लैंड से आकर पिता को दिया नया जीवन

मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ में हुआ सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट
 
बेटे ने इंग्लैंड से आकर पिता को दिया नया जीवन
लखनऊ डेस्क (आर. एल. पाण्डेय)।  मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के चिकित्सकों ने एक जटिल और चुनौतीपूर्ण लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 50 वर्षीय लखनऊ निवासी श्री जय प्रकाश को नया जीवन प्रदान किया है। वे लंबे समय से शराब से जुड़ी एडवांस्ड लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे और उनकी बीमारी अंतिम अवस्था में पहुंच चुकी थी।

मरीज को पेट में बार-बार पानी भरना, किडनी की गंभीर समस्या, प्लेटलेट्स का अत्यधिक कम हो जाना, लिवर में बढ़े दबाव के कारण अंदरूनी रक्तस्राव और सांस लेने में परेशानी जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था। पिछले दो वर्षों से पूरी तरह शराब छोड़ने और लगातार उपचार के बावजूद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिससे सामान्य जीवन और कामकाज लगभग असंभव हो गया था। ऐसे में लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र जीवनरक्षक विकल्प बचा।

मरीज को डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीक़ी, डायरेक्टर – हेपेटो-पैंक्रियाटो-बिलियरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के पास रेफर किया गया। अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा विस्तृत जांच की गई। पहले छोटे बेटे को डोनर के रूप में परखा गया, लेकिन लिवर का आकार अपर्याप्त पाया गया।

इसी नाजुक समय में मरीज के बड़े बेटे श्री अनुराग वलेच्छा आगे आए, जो इंग्लैंड के कैम्ब्रिज स्थित रॉयल कॉलेज में कंप्यूटर साइंस विभाग से जुड़े हैं। वे तुरंत भारत पहुंचे और आवश्यक मेडिकल जांच प्रक्रिया पूरी की। सभी परीक्षणों के बाद उन्हें उपयुक्त डोनर घोषित किया गया। इसके बाद बिना किसी बड़ी जटिलता और अत्यधिक रक्त चढ़ाए बिना सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।

डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीक़ी ने बताया,“मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। किडनी और फेफड़ों की समस्याओं के कारण यह ट्रांसप्लांट बेहद जोखिमपूर्ण था। समय पर डोनर की उपलब्धता, सटीक सर्जिकल प्लानिंग और हमारी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के समन्वित प्रयासों ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई।”

सर्जरी के बाद डोनर और मरीज दोनों की रिकवरी संतोषजनक रही। डोनर को ऑपरेशन के छठे दिन छुट्टी दे दी गई और जांच में लिवर का आकार लगभग सामान्य पाया गया, जो लिवर की प्राकृतिक पुनर्निर्माण क्षमता को दर्शाता है। वहीं मरीज को बारहवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस अवसर पर डॉ. राजेश डे, डायरेक्टर – लिवर ट्रांसप्लांट एवं बाइलरी साइंसेज़, मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली ने कहा,“गंभीर लिवर रोगियों के लिए लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कई बार जीवन बचाने का एकमात्र विकल्प होता है, विशेषकर तब जब बीमारी अन्य अंगों को भी प्रभावित करने लगती है। यह केस हमारी ट्रांसप्लांट टीम की विशेषज्ञता, सही डोनर-रिसीपिएंट मिलान और उत्कृष्ट पोस्ट-ऑपरेटिव केयर का उदाहरण है।”

वर्तमान में श्री जय प्रकाश पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके बिलीरुबिन स्तर, प्लेटलेट काउंट और लिवर फ़ंक्शन टेस्ट सभी सामान्य पाए गए हैं। यह मामला मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ की उन्नत लिवर ट्रांसप्लांट सुविधाओं, जटिल मामलों के सफल प्रबंधन और मरीज़-केंद्रित संवेदनशील देखभाल का सशक्त प्रमाण है—जहाँ आधुनिक चिकित्सा, समय पर निर्णय और बेटे के त्याग ने मिलकर एक जीवन को नया सवेरा दिया।

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