सावन के अंतिम सोमवार पर श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना
लखनऊ, 24 अगस्त। सावन के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर चौक कोतवाली स्थित श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। भारी बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बताया कि सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर प्रातःकाल भगवान को विधि-विधान से स्नान कराकर उनका विशेष श्रृंगार किया गया।
महंत के अनुसार, इस बार सावन के अंतिम सोमवार पर ब्रह्म योग, इंद्र योग, रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग सहित कई शुभ संयोगों का उल्लेख किया गया। साथ ही गुरु-शुक्र की युति से बनने वाले गजलक्ष्मी राजयोग को भी इस दिन की विशेषता से जोड़ा गया। इन शुभ योगों के कारण भक्तों में पूजा-अर्चना को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
पंचामृत और विभिन्न पूजन सामग्रियों से हुआ अभिषेक
श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग का गंगाजल, दूध, घी, दही, शक्कर, मिश्री, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर भगवान महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना की।
जलाभिषेक के दौरान भक्तों ने ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया। महंत विशाल गौड़ ने बताया कि सनातन परंपरा में पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का विशेष महत्व माना गया है। भगवान शिव को समर्पित इस मंत्र के जाप के साथ श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की।
बारिश के बीच भी नहीं कम हुआ भक्तों का उत्साह
महंत विशाल गौड़ ने बताया कि सुबह से हो रही भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। भक्त लगातार मंदिर पहुंचते रहे और भगवान शिव का अभिषेक कर पूजा-अर्चना करते रहे। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान सोमवार के व्रत एवं शिव आराधना की विशेष धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालुओं ने सावन के अंतिम सोमवार पर महादेव से परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की। सावन के अंतिम सोमवार को मंदिर परिसर में दिनभर ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष गूंजते रहे। विशेष पूजन, अभिषेक और श्रृंगार के साथ मंदिर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

