शिव शांति संत आसूदा राम आश्रम में श्रीमद्भगवद्गीता पर विशेष सत्संग, जीवन में संत संग और सेवा का महत्व बताया
सत्संग को संबोधित करते हुए श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करना चाहिए। उनके अनुसार, गीता जीवन को समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि गीता का अध्ययन केवल पढ़ने तक सीमित न रहकर उसके संदेश को समझने और जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता को गुरु के निर्देशन में पढ़ना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उसके संदेश और आध्यात्मिक भाव को सही संदर्भ में समझने में सहायता मिलती है। गुरु के मार्गदर्शन में शास्त्रों का अध्ययन करने से व्यक्ति उनके वास्तविक उद्देश्य को बेहतर ढंग से समझ सकता है।

श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने संत संग को जीवन के लिए अत्यंत मूल्यवान बताते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने दैनिक कर्तव्यों का निर्वहन करने के साथ-साथ संतों और भगवान की सेवा के लिए भी समय निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों का संग व्यक्ति को आध्यात्मिक चिंतन और सकारात्मक जीवन-दृष्टि की ओर प्रेरित कर सकता है।

उन्होंने जीवन में संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को न तो किसी वस्तु या परिस्थिति के प्रति अत्यधिक आसक्ति रखनी चाहिए और न ही अत्यधिक विरक्ति का भाव अपनाना चाहिए। सुख और दुख, दोनों परिस्थितियों में समान भाव बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

सत्संग के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान, गुरु, साधु और शास्त्र के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्ति को जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आध्यात्मिक जीवन के साथ अपने सामाजिक एवं पारिवारिक दायित्वों का संतुलित रूप से निर्वहन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी के प्रति आभार व्यक्त किया।
