SRMU News: डिजिटल दौर में तकनीक और नैतिकता का संतुलन जरूरी; रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में 'हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष' पर राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

SRMU News: Balancing Technology and Ethics is Essential in the Digital Age; National Conference on '200 Years of Hindi Journalism' Concludes at Ramswaroop Memorial University
 
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Lucknow/Barabanki Media Update, 30 May 2026: हिंदी पत्रकारिता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज द्वारा एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। "200 वर्ष हिंदी पत्रकारिता: डिजिटल युग में अवसर और चुनौतियाँ" विषय पर आधारित इस सेमिनार में देश के नामचीन शिक्षाविदों, मीडिया दिग्गजों और शोधार्थियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान हिंदी पत्रकारिता के दो सदियों के गौरवशाली सफर, उसकी उपलब्धियों और वर्तमान इंटरनेट युग में पैदा हुई नई संभावनाओं व विसंगतियों पर गहन मंथन किया गया।

तकनीक के साथ पत्रकारिता के मूल मूल्यों का संरक्षण आवश्यक" - डॉ. विनोद कुमार सिंह

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (वाराणसी) के वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. विनोद कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में अपना कीनोट व्याख्यान दिया। उन्होंने बदलते दौर में मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा हिंदी पत्रकारिता ने देश में राष्ट्रीयता की अलख जगाने, जनचेतना का विस्तार करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजने में हमेशा ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आज के इस अत्याधुनिक डिजिटल और एआई (AI) युग में पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांत—सत्य, निष्पक्षता और जनसरोकार—पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गए हैं। युवा पीढ़ी को तकनीक को अपनाना चाहिए, लेकिन नैतिकता के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए।"

 भाषायी अस्मिता और डिजिटल मीडिया की व्यावहारिक चुनौतियाँ

सम्मेलन में अन्य वक्ताओं ने भी पत्रकारिता के आधुनिक स्वरूप पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए:

  • सामाजिक प्रतिबद्धता पर जोर: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) के युवा विचारक डॉ. संदीप वर्मा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता केवल सूचनाएं बांटने का जरिया नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव और वैचारिक बहसों का एक सशक्त मंच है। वैश्वीकरण (Globalization) के इस दौर में हिंदी मीडिया के सामने अपनी भाषायी अस्मिता और जनपक्षधरता को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।

  • फेक न्यूज सबसे बड़ा संकट: 'द क्विंट हिंदी' के एक्जीक्यूटिव एडिटर श्री विकास कुमार ने डिजिटल पत्रकारिता के व्यावहारिक धरातल को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज पाठकों और दर्शकों के न्यूज़ देखने-पढ़ने का तरीका तेजी से बदला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने स्वतंत्र पत्रकारिता को नए पंख दिए हैं, लेकिन इसी के साथ 'फेक न्यूज' (Fake News), खबरों की विश्वसनीयता और पाठकों का भरोसा जीतना आज के समय का सबसे बड़ा संकट है। उन्होंने युवा पत्रकारों को डेटा जर्नलिज्म और आधुनिक डिजिटल टूल्स से खुद को अपडेट रखने की सलाह दी।

 कार्यक्रम का सफल संचालन और आयोजन टीम

इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत में इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज के निदेशक प्रो. (डॉ.) रजाउर रहमान ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होना भारतीय भाषायी और सांस्कृतिक चेतना के लिए बेहद गौरव का क्षण है।

  • संयोजन: सम्मेलन का सफल संयोजन डॉ. अमित कुमार सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों से सबको अवगत कराया।

  • संचालन (Moderator): असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप सिंह ने पूरे सत्र के दौरान मॉडरेटर की भूमिका निभाते हुए वक्ताओं और विद्यार्थियों के बीच एक बेहद सार्थक और ज्ञानवर्धक संवाद स्थापित किया।

  • धन्यवाद ज्ञापन: कार्यक्रम के समापन पर इंस्टीट्यूट के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और सम्मेलन के चेयरमैन डॉ. प्रदीप कुमार ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समृद्ध इतिहास की बुनियाद पर ही डिजिटल युग के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

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