उत्तर प्रदेश में बनेगा राज्य सहकारी महाविद्यालय, सहकारिता अध्ययन व शोध को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने सहकारिता से जुड़े अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सहकारी महाविद्यालय स्थापित करने की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। यह निर्णय मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में हुई समीक्षा बैठक के दौरान लिया। केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस पहल की सराहना की और आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस दिशा में हरसंभव सहयोग करेगी।
एम-पैक्स सदस्यता महाभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ मंत्र को आगे बढ़ाते हुए 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक एम-पैक्स सदस्यता महाभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य हर किसान और हर ग्रामीण परिवार को सहकारिता से जोड़ना है।
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पिछले वर्ष आयोजित पहले अभियान में 30 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े थे।
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इनमें 17.33 लाख किसान, 3.92 लाख अकुशल श्रमिक, 1.56 लाख कुशल श्रमिक, 2.20 लाख पशुपालक और 6,411 मत्स्यपालक शामिल थे।
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इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र को ₹70 करोड़ का अंशदान प्राप्त हुआ।
सीएम योगी ने निर्देश दिए कि इस बार अभियान और व्यापक हो, जिसके लिए गांव-गांव में कैंप, ऑनलाइन/ऑफलाइन पंजीकरण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
सहकारी बैंकिंग सुधार और उपलब्धियां
बैठक में सहकारी बैंकिंग की स्थिति की समीक्षा की गई।
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2017 से अब तक 16 बंद जिला सहकारी बैंक को ₹306.92 करोड़ की सहायता से पुनर्जीवित किया गया।
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वर्ष 2017 में जहां बैंकों का एनपीए ₹800 करोड़ था, वहीं मार्च 2025 तक घटकर ₹278 करोड़ रह गया।
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मार्च 2025 तक ₹1000 करोड़ का ऋण कारोबार दर्ज हुआ और सभी बैंक लाभ में आ गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “किसानों और जमाकर्ताओं का विश्वास ही सहकारिता की असली पूंजी है। इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाएगा।”
अन्न भंडारण योजना
बैठक में एफसीआई की अन्न भंडारण योजना पर भी चर्चा हुई।
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प्रदेश के 35 जिलों में 96 स्थलों की पहचान की गई है।
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सीएम ने निर्देश दिए कि 15 नवम्बर 2025 तक वित्तीय प्रक्रिया पूरी कर जनवरी 2026 से निर्माण शुरू कर दिया जाए।
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अप्रैल 2026 तक इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एम-पैक्स की प्रगति
समीक्षा में बताया गया कि:
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2024-25 में 266 एम-पैक्स बने, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 457 नए एम-पैक्स गठित हो चुके हैं।
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सितंबर तक 1,088 ग्राम पंचायतों में नए संगठन की प्रक्रिया चल रही है।
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उर्वरक वितरण हेतु एम-पैक्स को ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा उपलब्ध है।
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अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ की मार्जिन मनी हासिल हुई।
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6,101 सोसाइटी में डिजिटल भुगतान की सुविधा लागू हो चुकी है।
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6,443 एम-पैक्स पीएम किसान समृद्धि केंद्र और 161 एम-पैक्स प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के रूप में विकसित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि जन औषधि केंद्र अस्पतालों के समीप खोले जाएं और सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य और सेवा क्षेत्रों में रोजगार का माध्यम बनाया जाए।
बैठक में शामिल रहे
इस बैठक में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रकाश शाही, धर्मपाल सिंह, संजय निषाद, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, भारत सरकार के सचिव सहकारिता डॉ. आशीष कुमार भूटानी, नाबार्ड के डीजीएम एन.एल. साहू तथा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
