State Level Workshop: यूपी को 'बाल श्रम मुक्त' बनाने के लिए एकजुट हुईं बड़ी संस्थाएं; राज्य स्तरीय कार्यशाला में तैयार हुई भविष्य की रणनीति
लखनऊ: उत्तर प्रदेश को बाल श्रम (Child Labour) की कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त करने और बाल अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यशाला जॉइनिंग फोर्सेज इंडिया (Joining Forces India), पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति (PGSS), पेस संस्थान (PACE) लखनऊ और सीएसीएल (CACL) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए गहन मंथन किया।
सरकारी प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का महाजुटान
इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के राज्य नोडल अधिकारी सैयद रिजवान अली विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ ही बाल कल्याण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाली देश और प्रदेश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रमुखों, नीति-निर्धारकों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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पारंपरिक शुरुआत: कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ पेस (PACE) संस्थान की सचिव राजविंदर कौर ने किया। उन्होंने कार्यशाला में आए सभी अतिथियों का आदरपूर्वक स्वागत किया और मुख्य मंच पर दीप प्रज्वलित कर सत्र की शुरुआत की।
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उद्देश्यों पर चर्चा: अपने स्वागत संबोधन में राजविंदर कौर ने कार्यशाला के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक समाज और सरकार मिलकर कदम नहीं उठाएंगे, तब तक बाल श्रम का पूर्ण उन्मूलन संभव नहीं है।
आपसी सामंजस्य से तैयार की गई भविष्य की रणनीति
कार्यशाला के मुख्य सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश को पूरी तरह से बाल श्रम मुक्त राज्य बनाने के लिए कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को जबरन मजदूरी से बचाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना बेहद जरूरी है।
सत्र की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार रहीं:
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संयुक्त कार्य योजना: कार्यक्रम के दौरान भविष्य में जमीन पर लागू की जाने वाली रणनीतियों का खाका तैयार किया गया। इसमें तय हुआ कि सभी संस्थाएं और सरकारी विभाग आपसी सामंजस्य (Coordination) से काम करेंगे ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन और बच्चों के पुनर्वास (Rehabilitation) को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
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कानूनी कड़ाई और जागरूकता: मुख्य अतिथि और अन्य वक्ताओं ने बाल श्रम विरोधी कानूनों को और अधिक कड़ाई से लागू करने तथा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
"आगामी चुनौतियां बड़ी हैं, सामूहिक सहयोग अनिवार्य" — थॉमसन थॉमस
पेस (PACE) संस्था के निदेशक थॉमसन थॉमस ने सत्र को संबोधित करते हुए भविष्य में आने वाली सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बदलते दौर के साथ बाल श्रम के स्वरूप भी बदल रहे हैं, जिससे निपटना एक बड़ी चुनौती है।
श्री थॉमस ने स्पष्ट किया कि इन चुनौतियों से अकेले कोई एक संस्था नहीं लड़ सकती, इसलिए सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग से एक मजबूत और व्यावहारिक आगामी कार्य योजना (Action Plan) तैयार करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
