डिजिटल एग्रीकल्चर और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को 100 प्रतिशत सैचुरेशन तक पहुंचाएं राज्य : शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू किए गए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति एवं आगामी रणनीति को लेकर शनिवार को पूसा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से दोनों मिशनों को 100 प्रतिशत सैचुरेशन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रभाव केवल सरकारी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि खेतों और किसानों की आय में दिखाई देना चाहिए।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री पियूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ग्रेबियल डेनवांग बागसू, नागालैंड के मंत्री महात यंथन, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चन्द्रा सहित विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
किसान आईडी बनाने में तेजी लाने के निर्देश
शिवराज सिंह चौहान ने फार्मर आईडी को डिजिटल कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सभी राज्यों को किसानों का डिजिटल सर्वे तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान आईडी बनने के बाद विभिन्न योजनाओं का भुगतान सीधे किसान के खाते में किया जा सकता है, जिससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तेज होती है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से एक महीने के भीतर किसान आईडी तैयार की जा सकती है, लेकिन इसके लिए गांवों में लगाए जाने वाले शिविरों का सही तरीके से संचालन जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से आईडी निर्माण और शिविरों के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने राज्यों से उपलब्ध निधि का उचित उपयोग सुनिश्चित करने को कहा।
डिजिटल जमीन रिकॉर्ड को बताया मिशन की रीढ़
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जमीन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड, नक्शों की जियो-रेफरेंसिंग और डेटा का सही सत्यापन डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की रीढ़ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डिजिटल सर्वे में आने वाली तकनीकी एवं मैदानी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, ताकि डिजिटल रिकॉर्ड वास्तविक जमीन की स्थिति से मेल खाए। उन्होंने कहा कि सर्वे जितना सटीक होगा, किसानों तक योजनाओं का लाभ उतनी ही प्रभावी तरीके से पहुंच सकेगा।
10.41 करोड़ किसान आईडी तैयार
सम्मेलन में बताया गया कि एग्रीस्टैक डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अब तक 10.41 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसमें 26 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। यह कवरेज पीएम-किसान के लाभार्थियों का करीब 84.68 प्रतिशत और लगभग 77 प्रतिशत ऑपरेशनल होल्डिंग्स के बराबर है।
गांवों के नक्शों की जियो-रेफरेंसिंग में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 5.9 लाख गांवों को कवर किया जा चुका है, जो चिन्हित गांवों का करीब 93.05 प्रतिशत है। इससे सटीक क्रॉप सर्वे और भूमि-पार्सल आधारित सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
डिजिटल क्रॉप सर्वे का दायरा भी लगातार बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में जहां यह 290 जिलों में हुआ था, वहीं रबी 2025-26 में इसका विस्तार 650 जिलों तक किया गया। खरीफ 2026-27 में इसे 692 जिलों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। क्षेत्र कवरेज भी 2024-25 के 3.87 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 9.18 करोड़ हेक्टेयर हो गया है और खरीफ 2026-27 के लिए 13.4 करोड़ हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
दलहन उत्पादन में बढ़ोतरी, आयात निर्भरता घटी
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था को भी मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल अधिक उत्पादन से किसान की आय नहीं बढ़ेगी, जब तक उसे अपनी उपज का उचित बाजार और बेहतर मूल्य नहीं मिलता।
आंकड़ों के अनुसार दलहन उत्पादन वर्ष 2024-25 के 256.83 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसी अवधि में दलहन का आयात 72.56 लाख मीट्रिक टन से घटकर 59.64 लाख मीट्रिक टन रह गया।
दलहन की खेती का क्षेत्रफल भी 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि उत्पादकता 926 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पहुंच गई है।
बीज से बाजार तक मजबूत हो पूरी वैल्यू चेन
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए बीज से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना होगा। उन्होंने राज्यों को सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रसंस्करण इकाइयों, भंडारण सुविधाओं और बाजार संपर्क को बढ़ाने पर जोर दिया।
वर्ष 2026-27 में राज्यों में कुल 528 दलहन प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने अधिकारियों से किसानों को समय पर बीज, खाद और अन्य इनपुट उपलब्ध कराने तथा भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने देने के निर्देश दिए। साथ ही अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी रखने को कहा।
सफल मॉडलों को दूसरे राज्यों में लागू करने पर जोर
राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों ने अपने अनुभव और सफल प्रयोग साझा किए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जहां प्रशिक्षण, फील्ड डेमो और निगरानी के साथ मिशन को गंभीरता से लागू किया गया, वहां बेहतर परिणाम सामने आए हैं। ऐसे सफल मॉडलों को दूसरे राज्यों में भी तेजी से लागू करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन किसानों तक योजनाओं की पहुंच को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा, जबकि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन किसानों की आय बढ़ाने के साथ देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से ईमानदारी, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई के साथ दोनों मिशनों को 100 प्रतिशत सैचुरेशन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
