संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के हाथों को मजबूत करना अनिवार्य: पूर्व मंत्री राजेंद्र गौतम
"तीन पूंजीपतियों के हाथों गिरवी है देश"
राजेंद्र गौतम ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने देश के संसाधनों और व्यापार को चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथों में गिरवी रख दिया है। उन्होंने कहा कि आज किसान, मजदूर, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग सरकार की नीतियों से त्रस्त है। मध्यम वर्ग और कमेरा वर्ग के पास रोजगार के साधन सीमित होते जा रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: चंडशोक से धर्माशोक की यात्रा
अपने संबोधन में उन्होंने सम्राट अशोक के उदाहरण के माध्यम से शांति और अहिंसा का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह कलिंग युद्ध (262-261 ई.पू.) के विनाश को देखकर सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने 'सैन्य दिग्विजय' का मार्ग छोड़कर 'धम्मविजय' (आध्यात्मिक विजय) का रास्ता चुना। गौतम ने कहा कि आज देश को उसी तरह की मानवीय और शांतिपूर्ण विचारधारा की आवश्यकता है।
राहुल गांधी: दलितों और वंचितों के नायक
राजेंद्र गौतम ने राहुल गांधी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें आधुनिक युग का जननायक बताया। उन्होंने कहा:
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राहुल गांधी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान को बचाने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।
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वे दलितों, पिछड़ों और वंचितों के हक के लिए एक मानवतावादी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
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मनुवाद और मनुस्मृति जैसी विचारधाराओं, जिन्होंने महिलाओं और दलितों के अधिकारों का हनन किया, उनके खिलाफ कांग्रेस डटकर खड़ी है।
कांग्रेस की कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र
पूर्व मंत्री ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू की गई ऐतिहासिक योजनाओं की याद दिलाई, जिन्हें वर्तमान सरकार ने या तो बंद कर दिया है या कमजोर कर दिया है:
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SC/ST एक्ट: दलितों और आदिवासियों की सुरक्षा के लिए कड़ा कानून।
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जनकल्याण: इंदिरा आवास योजना और इंदिरा गांधी पेंशन योजना।
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शिक्षा एवं रोजगार: राजीव गांधी फेलोशिप योजना और मनरेगा (MGNREGA)।
संविधान बचाने का संकल्प
सम्मेलन का समापन करते हुए राजेंद्र गौतम ने जनता से आह्वान किया कि यदि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों और बाबा साहब के संविधान को सुरक्षित रखना है, तो कांग्रेस की विचारधारा को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति जैसे विचार, जिन्हें बाबा साहब ने समानता के अधिकार के लिए नकारा था, आज फिर सिर उठा रहे हैं, जिनसे सावधान रहने की जरूरत है।
