विकसित भारत के संकल्प की मजबूत नींव: केंद्रीय बजट 2026–27
हरीश चंद्र श्रीवास्तव (प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी)भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 केवल आय–व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में एक दूरदर्शी रोडमैप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रखे गए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को यह बजट स्पष्ट दिशा और गति प्रदान करता है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं, व्यापारिक तनावों और भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है, यह बजट भारत के आत्मविश्वास और अवसर खोजने की क्षमता को दर्शाता है।
इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें तात्कालिक लोकप्रियता के बजाय दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी गई है। राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था की नींव रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
युवा, महिला और MSME: विकास के तीन मजबूत स्तंभ
युवा भारत की ऊर्जा को ध्यान में रखते हुए रोजगार सृजन, कौशल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है। महिला सशक्तिकरण से जुड़ी ठोस योजनाएं सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
MSME सेक्टर के लिए घोषित ग्रोथ फंड और ऋण गारंटी सीमा में वृद्धि से देश के लगभग 6 करोड़ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नई मजबूती मिलेगी, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहां उद्यमिता की वास्तविक संभावनाएं मौजूद हैं।
उद्योग, निर्यात और ‘मेक इन इंडिया’ को नई धार
वैश्विक टैरिफ तनावों के बीच उद्योग और व्यापार को निर्बाध गति देना बजट की एक अहम उपलब्धि है। उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए नीतिगत ढांचा मजबूत किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और बायोफार्मा शक्ति जैसी पहलें इसी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
अवसंरचना: विकास का इंजन
बजट में अवसंरचना विकास को केंद्रीय स्थान दिया गया है। देश में प्रस्तावित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम करेंगे, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित करने की घोषणा जल परिवहन को किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में स्थापित करेगी।
उत्तर प्रदेश के लिए विशेष अवसर
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में यह बजट विशेष रूप से उत्साहजनक है। सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) योजना टियर-2 और टियर-3 शहरों—जैसे कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और झांसी—के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। प्रत्येक CER को पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा।हाई-स्पीड रेल के दो प्रमुख कॉरिडोर—दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी—उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेंगे, जिससे राज्य को विश्वस्तरीय रेल संपर्क मिलेगा। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) के तहत वाराणसी में इनलैंड वॉटरवेज शिप रिपेयर इकोसिस्टम की स्थापना आध्यात्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को नया आयाम देगी।
संस्कृति, स्वास्थ्य और कृषि को बल
सारनाथ और हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक स्थलों को जीवंत सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूती देगी।स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रत्येक जिला अस्पताल में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सुविधाओं का विस्तार ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवन रक्षक सिद्ध होगा।कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने, उच्च मूल्य फसलों को बढ़ावा देने और जलाशयों के एकीकृत विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ODOP जैसी योजनाओं को MSME फंड से नई ऊर्जा मिलेगी।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 रोजगार, अवसंरचना, उद्योग, कृषि और सामाजिक कल्याण को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज है। यह न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि 2047 तक भारत को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की ठोस नींव भी रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई विकास यात्रा को यह बजट नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा।
