स्टडी हॉल के वार्षिकोत्सव में छात्रों ने जीवंत किया भारतीय ज्ञान की परंपरा

Students brought the tradition of Indian knowledge to life at the Study Hall's annual celebration.
 
Students brought the tradition of Indian knowledge to life at the Study Hall's annual celebration.

लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय): स्टडी हॉल स्कूल द्वारा 7 नवम्बर 2025 को वार्षिक सांस्कृतिक समारोह “From Ancient Roots to Modern Wings” (प्राचीन जड़ों से आधुनिक पंखों तक) का आयोजन संत गाडगे जी ऑडिटोरियम, गोमती नगर में किया गया। यह कार्यक्रम भारत की सदियों पुरानी ज्ञान प्रणाली और उसके निरंतर विकास को समर्पित था।

कक्षा 6 से 12 तक के 500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने मंच पर देश की बौद्धिक और सांस्कृतिक यात्रा को रोचक शैली में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि भारत की असली शक्ति उसकी सत्य, शांति और एकता जैसे शाश्वत मूल्यों में निहित है।

छात्रों ने इतिहास, दर्शन, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक ज्ञान को संगीत, नृत्य, नाट्य और वाचन के माध्यम से रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त किया। स्कूल की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. उर्वशी साहनी ने कहा कि बच्चों में सीखने की प्रक्रिया तब और प्रभावी होती है जब उन्हें सीख कर दिखाने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि स्कूल अपने 40 वर्ष पूरे करने की दिशा में अग्रसर है।

इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न कालखंडों — वेद, छह दर्शन (षड्दर्शन), चाणक्य नीति, बौद्ध विचारधारा और सम्राट अशोक के जीवन परिवर्तन तक की झलक प्रस्तुत की गई। साथ ही गुप्त और चोल काल की सांस्कृतिक समृद्धि, विक्रम-बेताल कथा, आर्यभट्ट, कालिदास, स्वामी विवेकानंद सहित भारत के अनेक महापुरुषों के योगदान को भी मंच पर दर्शाया गया। सूफी परंपरा और समाज सुधारकों की भूमिका को भी छात्रों ने सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।

स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती मीनाक्षी बहादुर ने कहा कि भारत के स्वर्णिम इतिहास और ज्ञान के आधार को समझना बच्चों के लिए बहुत आवश्यक है। इस कार्यक्रम ने छात्रों को योग, आयुर्वेद से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा प्रणाली, खेल उपलब्धियों और कोवैक्सिन जैसे आधुनिक नवाचारों के बीच संबंध को समझने में मदद की। कार्यक्रम का समापन “मंगलम्” नृत्य और प्रार्थना प्रस्तुति से हुआ, जिसमें सभी जीवों की शांति, कल्याण और समृद्धि की कामना की गई। यह प्रस्तुति “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भारतीय भावना का प्रतीक बनी।

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