शैक्षिक भ्रमण पर निकले पीएम श्री विद्यालय के छात्र, गोंडा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का किया अवलोकन

Students from a PM Shri School set out on an educational tour, visiting historical and religious sites in Gonda.
 
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गोंडा।  PM SHRI Schools के अंतर्गत संचालित पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय देवरिया मुबारकपुर के छात्र-छात्राओं ने शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के तहत जनपद गोंडा के विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक और आधुनिक स्थलों का भ्रमण किया। प्रधानाचार्य अरुण यादव के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ अपनी संस्कृति, इतिहास और विरासत से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना था।

भ्रमण की शुरुआत Jayaprabha Gram से हुई, जिसे देश के पहले आत्मनिर्भर और आधुनिक गांव के रूप में जाना जाता है। यह गांव Nanaji Deshmukh की संकल्पना से विकसित हुआ है और ग्रामीण विकास का आदर्श मॉडल माना जाता है। यहां स्थित जयप्रभा ग्राम पार्क की हरियाली और शांत वातावरण ने छात्रों को प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के महत्व से परिचित कराया। साथ ही नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित प्रशिक्षण केंद्रों को देखकर विद्यार्थियों ने आत्मनिर्भरता के महत्व को भी समझा।

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इसके बाद छात्र Prithvinath Temple पहुंचे। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां द्वापर युग का शिवलिंग स्थापित है जिसे पांडवों में से भीम ने अज्ञातवास के दौरान स्थापित किया था। बताया जाता है कि यह शिवलिंग लगभग 55 फीट ऊंचा है और इसका एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे समाया हुआ है। इसे एशिया के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक माना जाता है।

यात्रा के अगले चरण में छात्र Jhali Dham Temple पहुंचे, जहां शिक्षिका सविता पांडेय और शुभेक्षा श्रीवास्तव ने बच्चों को मंदिर और प्राचीन सरोवर के इतिहास की जानकारी दी। छात्रों ने सरोवर के किनारे बैठकर मछलियों को चारा खिलाया और जलीय जीवों के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिससे विज्ञान विषय के प्रति उनका रुचि भी बढ़ी।

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छात्रों ने इसके बाद Char Dham Temple के भी दर्शन किए और यहां की वास्तुकला की सराहना की। पूरे भ्रमण के दौरान छात्र उत्साहित दिखाई दिए और उन्होंने अपनी डायरी में महत्वपूर्ण जानकारियां भी नोट कीं।

प्रधानाचार्य अरुण यादव ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है तथा उनमें सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति सम्मान बढ़ता है और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त होता है।इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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