स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन के 40 साल पूरे, ‘टेपेस्ट्री ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ प्रदर्शनी में दिखा बदलाव का सफर
छह बच्चों से शुरू हुआ सफर 50 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंचा, एक लाख से ज्यादा शिक्षकों को भी किया प्रशिक्षित
लखनऊ, 4 नवंबर 2026। स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) ने अपनी स्थापना के 40 वर्ष पूरे होने पर स्टडी हॉल परिसर में ‘टेपेस्ट्री ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ नाम से विशेष प्रदर्शनी आयोजित की। इसमें संस्था के चार दशक के शैक्षिक सफर, उपलब्धियों और सामाजिक बदलाव की कहानियों को प्रदर्शित किया गया। 4 नवंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में भारत और विदेश से आए मेहमानों के साथ विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और पूर्व विद्यार्थी शामिल हुए।

प्रदर्शनी के माध्यम से आगंतुकों को पिछले चार दशकों में फाउंडेशन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों और पहलों को करीब से जानने का अवसर मिला। संस्था के विभिन्न स्कूलों और कार्यक्रमों ने अपने काम को अलग-अलग रचनात्मक तरीकों से प्रस्तुत किया। कहीं विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और मॉडल प्रदर्शित किए गए, तो कहीं शिक्षण की नई पद्धतियों, संवादपरक गतिविधियों और बच्चों के सीखने के अनुभवों को सामने रखा गया।

शिक्षा को किताबों और परीक्षाओं से आगे ले जाने का प्रयास
प्रदर्शनी में स्टडी हॉल स्कूल, प्रेरणा गर्ल्स स्कूल, विद्यास्थली और फाउंडेशन के अन्य कार्यक्रमों की गतिविधियों को जगह दी गई। इनके माध्यम से बताया गया कि शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों में सोचने, सवाल करने, अपनी बात रखने और आसपास की दुनिया को समझने की क्षमता विकसित करना भी है। इस दौरान लड़कियों की शिक्षा, समुदायों के साथ मिलकर काम करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण और वंचित वर्गों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया।

बच्चों और शिक्षकों ने खुद साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्वयं अपने कार्यों को आगंतुकों के सामने प्रस्तुत किया। बच्चों ने अपने प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी, उनके पीछे की सोच समझाई और सीखने के दौरान मिले अनुभव साझा किए। इससे बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की क्षमता की झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर फाउंडेशन की पहल ‘टीचर ऑफ द ईयर’ प्रतियोगिता के विजेता शिक्षकों के वीडियो भी प्रदर्शित किए गए। इनके जरिए शिक्षकों के समर्पण, मेहनत और कक्षाओं में किए जा रहे नए प्रयोगों को सामने लाया गया। यह पहल बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में शिक्षकों की भूमिका और उनके योगदान को सम्मान देने का माध्यम बनी।

छह बच्चों से शुरू होकर 50 लाख से अधिक तक पहुंचा सफर
‘टेपेस्ट्री ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ प्रदर्शनी पुराने और नए साथियों को एक मंच पर लाने का अवसर भी बनी। लोगों ने संस्था की पुरानी उपलब्धियों को याद किया और नई पहलों के बारे में जानकारी हासिल की। इस पूरे सफर में शिक्षा में समानता, सामाजिक न्याय और प्रत्येक बच्चे के बेहतर भविष्य का विचार प्रमुख रूप से जुड़ा रहा है।

स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन की शुरुआत वर्ष 1986 में डॉ. उर्वशी साहनी ने महज छह बच्चों के साथ की थी। चार दशक बाद संस्था का कार्यक्षेत्र व्यापक हो चुका है। फाउंडेशन के अनुसार, अब तक वह 50 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच चुका है और एक लाख से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण दे चुका है।

बदलाव की कहानियों का उत्सव बनी प्रदर्शनी
यह प्रदर्शनी केवल संस्थागत उपलब्धियों को प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के योगदान का उत्सव भी बनी, जिन्होंने इस यात्रा को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। इसके जरिए यह संदेश दिया गया कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह बच्चों को सवाल करने, स्वतंत्र रूप से सोचने, रचनात्मक बनने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्षम बनाए।

स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन के बारे में
स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) की स्थापना वर्ष 1986 में डॉ. उर्वशी साहनी ने लखनऊ में की थी। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए कार्य करती है। अपने स्कूलों, सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रमों और शिक्षक प्रशिक्षण पहलों के माध्यम से संस्था अब तक 50 लाख से अधिक बच्चों और एक लाख से अधिक शिक्षकों तक पहुंच चुकी है।
