मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ में एचआईवी पॉजिटिव मरीज का सफल किडनी ट्रांसप्लांट, डॉक्टरों ने रचा नया मेडिकल कीर्तिमान
लखनऊ, 29 अप्रैल 2026: Max Super Speciality Hospital के डॉक्टरों ने एक जटिल और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए एचआईवी पॉजिटिव मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह सफल ट्रांसप्लांट न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धि है, बल्कि उन मरीजों के लिए भी उम्मीद की नई किरण है जिन्हें पहले हाई-रिस्क श्रेणी में माना जाता था।
गोंडा निवासी 41 वर्षीय मरीज को वर्ष 2018 में एचआईवी संक्रमण का पता चला था। समय के साथ उसकी किडनी की कार्यक्षमता लगातार घटती गई और वह एंड-स्टेज रीनल डिजीज की स्थिति तक पहुंच गया। हालत गंभीर होने के कारण मरीज को वर्ष 2023 से नियमित डायलिसिस पर रहना पड़ रहा था। एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी जारी रहने के बावजूद कई अस्पतालों ने मामले की जटिलता को देखते हुए ट्रांसप्लांट से परहेज किया।
जनवरी 2026 में मरीज को मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ की ट्रांसप्लांट टीम के पास रेफर किया गया। यहां नेफ्रोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ Dr. Venkatesh Thammishetty तथा यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ Dr. Rahul Yadav और Dr. Aditya Kumar Sharma ने मरीज की विस्तृत जांच कर उपचार की रणनीति तैयार की।
डॉक्टरों ने मरीज की एचआईवी स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसकी एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी में आवश्यक बदलाव किए, ताकि ट्रांसप्लांट के बाद शरीर दवाओं के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया दे सके। मरीज की पत्नी ने डोनर बनकर सहयोग किया और सभी जरूरी जांचों में अनुकूलता मिलने के बाद सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार स्थिर बनी रही और एक सप्ताह के भीतर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मरीज को डायलिसिस की आवश्यकता नहीं है और वह सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
इस सफलता पर डॉ. वेंकटेश थम्मिशेट्टी ने कहा कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी के साथ किडनी ट्रांसप्लांट करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है और इसके लिए विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय, सटीक मेडिकल प्लानिंग और नियमित निगरानी की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि सही प्रोटोकॉल अपनाकर ऐसे मरीजों में भी सफल ट्रांसप्लांट संभव है।
सर्जिकल टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. राहुल यादव और डॉ. आदित्य कुमार शर्मा ने बताया कि मरीज और डोनर दोनों की स्थिति पूरी तरह स्थिर है तथा मरीज तय दवा योजना के अनुसार इम्यूनोसप्रेसिव और एंटीरेट्रोवायरल दवाएं ले रहा है। यह सफल ट्रांसप्लांट चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता का उदाहरण है, जो भविष्य में जटिल परिस्थितियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा।
