सुशिक्षित और स्वस्थ समाज का संदेश दे रही हैं सुनील सरला की कठपुतलियां
(कुमार कृष्णन - विनायक फीचर्स)
कभी मनोरंजन का सशक्त माध्यम रही कठपुतली कला आज सामाजिक जागरूकता का प्रभावी जरिया बन चुकी है। 21 मार्च को दुनियाभर में विश्व कठपुतली दिवस मनाया जाता है, जो इस प्राचीन कला के महत्व को रेखांकित करता है।
समय के साथ टीवी और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव ने इस कला को बच्चों से दूर जरूर किया, लेकिन आज भी कुछ कलाकार इसे जीवंत बनाए रखने के साथ समाज को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं।
🪆 इतिहास और परंपरा से जुड़ी जीवंत कला
कठपुतली कला भारत की प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। पाणिनी के ‘अष्टाध्यायी’ में पुतला नाटक का उल्लेख मिलता है, वहीं ‘सिंहासन बत्तीसी’ और तमिल ग्रंथ ‘शिल्पादिकारम्’ में भी पुतलियों का वर्णन मिलता है।
यह कला लेखन, नाट्य, चित्रकला, संगीत, नृत्य और शिल्प का अद्भुत संगम है, जो मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा का भी माध्यम बनती है।
🌱 कठपुतलियों से सामाजिक बदलाव की पहल
बिहार के मुजफ्फरपुर के लोक कलाकार सुनील कुमार सरला कठपुतली कला के माध्यम से समाज में जागरूकता फैला रहे हैं।
वे जल संरक्षण, पर्यावरण, बाल विवाह, बाल श्रम, नशामुक्ति, जेंडर समानता और स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषयों को गीत, संगीत और कहानियों के जरिए सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
‘जल जीवन हरियाली’ जैसे अभियानों को कठपुतलियों के माध्यम से समझाकर वे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
🎓 शिक्षा और प्रशिक्षण का अनूठा माध्यम
सुनील सरला न केवल एक कलाकार, बल्कि प्रशिक्षक के रूप में भी सक्रिय हैं। वे बच्चों और शिक्षकों को कठपुतली निर्माण और संचालन का प्रशिक्षण देते हैं।
उन्होंने Humana People to People India, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों, डायट मुजफ्फरपुर सहित कई संस्थानों में प्रशिक्षण देकर सैकड़ों लोगों को इस कला से जोड़ा है।
उनका मानना है कि रचनात्मक तरीकों से शिक्षा देने पर बच्चे पढ़ाई में अधिक रुचि लेते हैं।
💊 जन औषधि और सामाजिक अभियानों में योगदान
कठपुतलियों के माध्यम से वे प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के बारे में भी जागरूकता फैला रहे हैं।
वे लोगों को सस्ती और प्रभावी दवाओं की उपलब्धता के बारे में सरल और मनोरंजक ढंग से जानकारी देते हैं। इस कार्य के लिए उन्हें परियोजना के बिहार नोडल पदाधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
🏆 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
सुनील कुमार को उनकी कला के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें अमेरिकी शिक्षिका लेसली द्वारा सम्मानित किया गया।
इसके अलावा उन्हें कर्ण पुरस्कार, समृद्धि कला सम्मान 2025, पर्यावरण मित्र सम्मान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने वर्ल्ड सोशल फोरम 2024 में भी अपनी प्रस्तुति दी।
✨ संस्कृति से समाज तक का सेतु
कठपुतली कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। सुनील सरला जैसे कलाकार इस परंपरा को नई दिशा देते हुए समाज को शिक्षित और जागरूक बना रहे हैं।
उनकी कठपुतलियां सचमुच एक सुशिक्षित, स्वस्थ और संवेदनशील समाज का संदेश दे रही हैं।
