पत्नी के सहयोग और संघर्ष के दम पर डिप्टी कलेक्टर बने सूरज यादव
पत्नी का भरोसा बना सबसे बड़ी ताकत
सूरज की शादी पूनम से हुई थी। शादी के बाद घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। ऐसे समय में सूरज ने पत्नी से पूछा— “क्या मैं नौकरी करूं या JPSC की तैयारी?”। पूनम का जवाब उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। उन्होंने कहा— “आप पढ़ाई कीजिए, खर्च की चिंता मत करिए।” साल 2020 तक पूनम के मायके वालों ने आर्थिक मदद की, जिससे सूरज बिना चिंता के पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाए। इस बीच उनके घर बेटे का जन्म हुआ, जिससे जिम्मेदारियां और बढ़ीं, लेकिन पूनम ने हर बार उनका हौसला बढ़ाया।
असफलता से मिली सीख
साल 2022 में सूरज ने JPSC की परीक्षा दी। कड़ी मेहनत के बावजूद मेंस में सिर्फ सात अंकों से वे चयनित नहीं हो पाए। इसी दौरान ससुराल में साली की शादी होने के कारण आर्थिक मदद भी बंद हो गई। फिर से वही सवाल खड़ा हुआ— कमाया जाए या पढ़ाई जारी रखी जाए। इस बार भी पूनम का जवाब वही था— “तैयारी कीजिए, सफलता जरूर मिलेगी।”
मेहनत और धैर्य का मिला फल
आर्थिक संकट से जूझते हुए सूरज ने डिलीवरी बॉय और रैपिडो जैसी पार्ट-टाइम नौकरियों के साथ JPSC की तैयारी जारी रखी। मेहनत रंग लाई और आखिरकार उन्होंने झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 110वीं रैंक हासिल की। अब सूरज यादव बतौर डिप्टी कलेक्टर अपनी नई जिम्मेदारी निभाएंगे।
