Swadeshi & Viksit Bharat 2047: भारतीय स्वतंत्रता की मूल आत्मा है 'स्वदेशिता', वंदेमातरम् के 150 वर्ष और युवा शक्ति से गढ़ा जाएगा स्वर्णिम भारत
लेखक: डॉ. शंकर सुवन सिंह (शिक्षाविद, वरिष्ठ स्तम्भकार एवं प्रोफेसर - फ़ूड टेक्नोलॉजी)
भारत वर्ष 2026 में अपनी आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। स्वाधीनता के 79 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर चुका राष्ट्र इस बार एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रहा है। इस वर्ष के राष्ट्रीय समारोह का मूल प्रसंग (थीम) "वंदेमातरम् के 150 वर्ष और विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति" रखा गया है। स्वतंत्रता संग्राम में प्राण फूंकने वाले अमर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लाल किले की प्राचीर से इसका सस्वर गायन एक नई और प्रेरक परंपरा का सूत्रपात कर रहा है।

वंदे मातरम्' के 150 गौरवशाली वर्ष: राष्ट्रचेतना का पुनर्जागरण
ऋषि तुल्य साहित्यकार बंकिमचंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को जिस अमर गीत 'वंदे मातरम्' की रचना की थी, उसने पराधीन भारत के जन-जन में मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा और स्वाधीनता का ज्वार भर दिया था। 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में इस गीत का 150वां वर्ष समारोहपूर्वक मनाया जा रहा है। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर इस राष्ट्रीय गीत की गूंज हर भारतीय को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और स्वदेशी स्वाभिमान से जोड़ती है।
युवा शक्ति, शोध और नवाचार: विकसित भारत 2047 की रीढ़
2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाने के संकल्प का सबसे मजबूत आधार देश की युवा शक्ति है।
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युवाओं की चुनौतियां: वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और विसंगतियों जैसी घटनाएं युवाओं के आत्मबल को प्रभावित करती हैं, जिनका स्थायी समाधान आवश्यक है।
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नवाचार और शोध (Innovation & Research): आज का भारतीय युवा नित नए अनुसंधानों, स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचारों को जन्म दे रहा है। जब युवा स्वतंत्र सोच और संगठित ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटेंगे, तभी आत्मनिर्भरता का लक्ष्य सिद्ध होगा।
स्वदेशी तकनीक: आधुनिकता और आत्मनिर्भरता का संगम
'स्वदेशिता' केवल एक विचार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का व्यावहारिक मार्ग है। विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रही भारतीय तकनीकें इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं:
| क्षेत्र (Sector) | प्रमुख स्वदेशी नवाचार व तकनीकें |
| परिवहन (Transport) | स्वदेशी सेमी-हाईस्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस का सफल नेटवर्क। |
| रक्षा (Defense) | स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस (LCA Tejas) और उन्नत हथियार प्रणालियां। |
| खाद्य प्रौद्योगिकी (Food Tech) | मिलेट (श्री अन्न) प्रसंस्करण, स्वदेशी फूड फोर्टिफिकेशन, आधुनिक कोल्ड चेन और सोलर ड्राइंग। |
| आधुनिक संरक्षण (Storage & AI) | एआई (AI) आधारित खाद्य गुणवत्ता निगरानी, आधुनिक पैकेजिंग और फूड वेस्ट से मूल्यवर्धित उत्पाद। |
संस्कृति, अध्यात्म और विश्वगुरु बनने की राह
भारत की पौराणिक संस्कृति और संस्कार यहां के जनमानस में रचे-बसे हैं। स्वदेशी तकनीकों का विकास केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी आध्यात्मिक चेतना और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली का भी विस्तार है।
आध्यात्मिक चेतना, स्वदेशी तकनीक का विकास और राष्ट्र की अक्षुण्ण एकता—इन तीनों के समन्वय से ही भारत वर्ष 2047 तक न केवल एक विकसित राष्ट्र बनेगा, बल्कि 'विश्वगुरु' के रूप में संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन भी करेगा।
