रामकृष्ण की राष्ट्रीय चेतना के मूर्त स्वरूप थे स्वामी विवेकानंद : डॉ. महिम तिवारी

Swami Vivekananda was the embodiment of Ramakrishna's national consciousness: Dr. Mahim Tiwari
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्तर के विचारक एवं प्रख्यात वक्ता डॉ. महिम तिवारी ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस की सनातन चेतना के मूर्त स्वरूप स्वामी विवेकानंद थे। उन्होंने सनातन धर्म के ध्वज को विश्व पटल पर फहराया और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक पहचान दिलाई।  संघ के पूर्व प्रचारक जनार्दन सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विधर्मियों द्वारा सनातन धर्म को कमजोर करने के कुत्सित प्रयासों को विफल किया। उन्होंने युवाओं को “वीरभोग्या वसुंधरा” का संदेश देकर आत्मबल और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाया।  सेवानिवृत्त हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार डॉ. शैलेन्द्र नाथ मिश्र ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके धर्म, राष्ट्र और मानवता से जुड़े संदेश इतने हृदयस्पर्शी थे कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला। उन्हीं संदेशों से प्रेरित होकर अनेक क्रांतिकारियों ने हँसते-हँसते बलिदान दिया।  समारोह में डॉ. संत शरण त्रिपाठी ने काव्यपाठ किया, वहीं उत्तम शुक्ल, ई. सुरेश दूबे एवं डॉ. मिथिलेश मिश्र ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान युवा प्रतिभागी कलाकारों को सोसाइटी के अध्यक्ष अमर किशोर कश्यप एवं गीता गोष्ठी के संयोजक सुरेश दूबे द्वारा सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर अनिल सिंह, पंकज दूबे, डॉ. शेर बहादुर सिंह, पंकज श्रीवास्तव, के.के. श्रीवास्तव, राकेश वर्मा, राघवेश तिवारी (चीकू), राजन पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गोण्डा। कामनमैन सोशल वेल्फेयर सोसाइटी के तत्वावधान में सोमवार को रामलीला मैदान में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर युवा दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही।

समारोह के प्रबंधक एवं पूर्व छात्र नेता धीरेन्द्र प्रताप पाण्डेय ने कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ने के उद्देश्य से सोसाइटी पिछले 21 वर्षों से निरंतर युवा समारोह का आयोजन करती आ रही है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्तर के विचारक एवं प्रख्यात वक्ता डॉ. महिम तिवारी ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस की सनातन चेतना के मूर्त स्वरूप स्वामी विवेकानंद थे। उन्होंने सनातन धर्म के ध्वज को विश्व पटल पर फहराया और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक पहचान दिलाई।संघ के पूर्व प्रचारक जनार्दन सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विधर्मियों द्वारा सनातन धर्म को कमजोर करने के कुत्सित प्रयासों को विफल किया। उन्होंने युवाओं को “वीरभोग्या वसुंधरा” का संदेश देकर आत्मबल और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाया।

सेवानिवृत्त हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार डॉ. शैलेन्द्र नाथ मिश्र ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके धर्म, राष्ट्र और मानवता से जुड़े संदेश इतने हृदयस्पर्शी थे कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला। उन्हीं संदेशों से प्रेरित होकर अनेक क्रांतिकारियों ने हँसते-हँसते बलिदान दिया।

समारोह में डॉ. संत शरण त्रिपाठी ने काव्यपाठ किया, वहीं उत्तम शुक्ल, ई. सुरेश दूबे एवं डॉ. मिथिलेश मिश्र ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान युवा प्रतिभागी कलाकारों को सोसाइटी के अध्यक्ष अमर किशोर कश्यप एवं गीता गोष्ठी के संयोजक सुरेश दूबे द्वारा सम्मानित किया गया।इस अवसर पर अनिल सिंह, पंकज दूबे, डॉ. शेर बहादुर सिंह, पंकज श्रीवास्तव, के.के. श्रीवास्तव, राकेश वर्मा, राघवेश तिवारी (चीकू), राजन पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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