टैफे ने मैसी डाइनास्टार कॉन्टेस्ट सीज़न 2 का किया सफल समापन

TAFE successfully concludes Massey Dynastar Contest  Season 2
 
इस सीज़न को देशभर से जबरदस्त प्रतिसाद मिला। 26 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों से 16,000+ प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जो भारतीय कृषि की विविधता को दर्शाती हैं। इनमें से 12 प्रतिभागियों को फाइनल में चुना गया, जो असम, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से थे। प्रतियोगिता में किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और कृषि छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे जमीनी स्तर पर नवाचार की समृद्ध संस्कृति दिखाई दी।  हाल ही में आयोजित ग्रैंड फिनाले में अनुभवी पेशेवरों की एक प्रतिष्ठित जूरी ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन नवाचार, व्यवहारिकता, विस्तार की संभावना, आय सृजन क्षमता और सामाजिक प्रभाव के आधार पर किया।  ग्रैंड प्राइज: कर्नाटक के बेलगाम के आईटी प्रोफेशनल से किसान बने अविनाश देसाई ने मोबाइल स्लरी डीवॉटरिंग मशीन का विचार प्रस्तुत कर पहला स्थान हासिल किया। उन्हें लगभग ₹8.2 लाख मूल्य का नया एमएफ 254 डाइनास्मार्ट 2WD ट्रैक्टर प्रदान किया गया।  द्वितीय पुरस्कार: असम के होजई के प्रतीक अग्रवाल को सौर ऊर्जा संचालित सस्टेनेबल एनर्जी हब के लिए 8 ग्राम का स्वर्ण सिक्का मिला।  तृतीय पुरस्कार: पंजाब के पटियाला के अमृत जोत सिंह को वॉटर प्यूरिफाइंग यूनिट के विचार के लिए 8 ग्राम का स्वर्ण सिक्का प्रदान किया गया।  विशेष जूरी पुरस्कार: असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी डॉ. जयकुमार करपुसामी को मल्टी-पर्पज फार्म मशीन के लिए 50 ग्राम का रजत सिक्का मिला।  संस्थानिक श्रेणी में:  तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कुमुलुर, त्रिची की टीम को 8-रो ट्रैक्टर-माउंटेड ट्रांसप्लांटर के लिए प्रथम पुरस्कार मिला।  बन्नारी अम्मान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इरोड ने ऑटोमेटेड मल्टी-वेजिटेबल ट्रांसप्लांटर के लिए दूसरा पुरस्कार जीता। दोनों प्रोजेक्ट मैसी फर्ग्यूसन डाइनाट्रैक 241 के अनुरूप डिजाइन किए गए थे। विजेता छात्रों को टैफे में इंटर्नशिप का अवसर भी मिला।  प्रतियोगिता में ट्रैक्टर, स्वर्ण एवं रजत सिक्के, इनोवेशन हैम्पर्स और डेवलपमेंट ग्रांट जैसे पुरस्कार दिए गए। यह पहल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने, किसानों के नेतृत्व में शोध एवं विकास को प्रोत्साहित करने और टेक्नोलॉजी के माध्यम से वास्तविक बदलाव लाने की टैफे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।  सीज़न 2 की सफलता से उत्साहित टैफे ने घोषणा की है कि मैसी डाइनास्टार कॉन्टेस्ट – सीज़न 3 अगले वर्ष और अधिक व्यापक पैमाने और प्रभाव के साथ आयोजित किया जाएगा, जिससे कृषि-उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा।
लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय)। दुनिया के अग्रणी ट्रैक्टर निर्माताओं में शामिल ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (TAFE), जो भारत में मशहूर मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर्स का निर्माण करता है, ने मैसी डाइनास्टार कॉन्टेस्ट – सीज़न 2 (2025) का सफलतापूर्वक समापन किया। इस अनोखी पहल का उद्देश्य बहुमुखी मैसी फर्ग्यूसन डाइनाट्रैक 241 ट्रैक्टर की क्षमताओं से प्रेरित मौलिक, व्यावहारिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली विचारों को पहचानना और प्रोत्साहित करना था।

इस सीज़न को देशभर से जबरदस्त प्रतिसाद मिला। 26 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों से 16,000+ प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जो भारतीय कृषि की विविधता को दर्शाती हैं। इनमें से 12 प्रतिभागियों को फाइनल में चुना गया, जो असम, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से थे। प्रतियोगिता में किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और कृषि छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे जमीनी स्तर पर नवाचार की समृद्ध संस्कृति दिखाई दी।

हाल ही में आयोजित ग्रैंड फिनाले में अनुभवी पेशेवरों की एक प्रतिष्ठित जूरी ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन नवाचार, व्यवहारिकता, विस्तार की संभावना, आय सृजन क्षमता और सामाजिक प्रभाव के आधार पर किया।

  • ग्रैंड प्राइज: कर्नाटक के बेलगाम के आईटी प्रोफेशनल से किसान बने अविनाश देसाई ने मोबाइल स्लरी डीवॉटरिंग मशीन का विचार प्रस्तुत कर पहला स्थान हासिल किया। उन्हें लगभग ₹8.2 लाख मूल्य का नया एमएफ 254 डाइनास्मार्ट 2WD ट्रैक्टर प्रदान किया गया।

  • द्वितीय पुरस्कार: असम के होजई के प्रतीक अग्रवाल को सौर ऊर्जा संचालित सस्टेनेबल एनर्जी हब के लिए 8 ग्राम का स्वर्ण सिक्का मिला।

  • तृतीय पुरस्कार: पंजाब के पटियाला के अमृत जोत सिंह को वॉटर प्यूरिफाइंग यूनिट के विचार के लिए 8 ग्राम का स्वर्ण सिक्का प्रदान किया गया।

  • विशेष जूरी पुरस्कार: असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी डॉ. जयकुमार करपुसामी को मल्टी-पर्पज फार्म मशीन के लिए 50 ग्राम का रजत सिक्का मिला।

संस्थानिक श्रेणी में

  • तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कुमुलुर, त्रिची की टीम को 8-रो ट्रैक्टर-माउंटेड ट्रांसप्लांटर के लिए प्रथम पुरस्कार मिला।

  • बन्नारी अम्मान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इरोड ने ऑटोमेटेड मल्टी-वेजिटेबल ट्रांसप्लांटर के लिए दूसरा पुरस्कार जीता। दोनों प्रोजेक्ट मैसी फर्ग्यूसन डाइनाट्रैक 241 के अनुरूप डिजाइन किए गए थे। विजेता छात्रों को टैफे में इंटर्नशिप का अवसर भी मिला।

प्रतियोगिता में ट्रैक्टर, स्वर्ण एवं रजत सिक्के, इनोवेशन हैम्पर्स और डेवलपमेंट ग्रांट जैसे पुरस्कार दिए गए। यह पहल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने, किसानों के नेतृत्व में शोध एवं विकास को प्रोत्साहित करने और टेक्नोलॉजी के माध्यम से वास्तविक बदलाव लाने की टैफे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सीज़न 2 की सफलता से उत्साहित टैफे ने घोषणा की है कि मैसी डाइनास्टार कॉन्टेस्ट – सीज़न 3 अगले वर्ष और अधिक व्यापक पैमाने और प्रभाव के साथ आयोजित किया जाएगा, जिससे कृषि-उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा।

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