टाटा पावर सोलर और बायो-सीएनजी माइक्रोग्रिड से ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

Tata Power Solar and Bio-CNG Microgrids Promote Energy Self-Reliance in Rural India
 
S  s
लखनऊ, 21 अप्रैल 2026:
ग्रामीण भारत में स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए Tata Power Company Limited की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी TP Renewable Microgrid ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के पसका बाजार में एक एकीकृत रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड मॉडल विकसित किया है। यह परियोजना सोलर ऊर्जा और बायोगैस आधारित समाधानों के जरिए ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।
गोंडा जिले के परसपुर ब्लॉक स्थित पसका गांव, जहां लगभग 2,500 परिवार निवास करते हैं, लंबे समय से अनियमित बिजली आपूर्ति और डीज़ल जनरेटर पर निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था। स्थानीय अर्थव्यवस्था में डेयरी व्यवसाय की अहम भूमिका है, जहां दूध संग्रह और शीतलन अत्यंत आवश्यक है।
इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, कंपनी ने दिसंबर 2020 में यहां 30 kWp का सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया, जिसे बढ़ाकर अब 50 kWp कर दिया गया है। इससे करीब 150 उपभोक्ताओं को किफायती और भरोसेमंद बिजली मिल रही है। यह माइक्रोग्रिड स्थानीय दुकानों, भोजनालयों, आटा चक्कियों और डेयरी केंद्रों को ऊर्जा प्रदान कर रहा है, जिससे उत्पादकता और आय में वृद्धि हो रही है।
यह पहल पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, जो हर वर्ष लगभग 16 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी लाती है।

डेयरी वैल्यू चेन को मजबूती

पसका बाजार क्षेत्रीय डेयरी नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां संचालित पांच बल्क मिल्क कूलर्स (BMCs) में से तीन अब माइक्रोग्रिड से जुड़े हैं, जिससे दूध के सुरक्षित भंडारण और खराब होने की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे किसानों और डेयरी उद्यमियों को सीधा लाभ मिल रहा है।

बायोगैस से घरेलू ऊर्जा समाधान

ऊर्जा आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने के लिए, कंपनी ने पसका से करीब 2 किमी दूर नयाबपुरवा बस्ती में 2 घन मीटर क्षमता का बायोगैस संयंत्र स्थापित किया है। यह संयंत्र पशु अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलकर खाना पकाने के लिए स्वच्छ विकल्प प्रदान करता है, जिससे एलपीजी पर निर्भरता घटती है और घरेलू खर्च में कमी आती है। साथ ही, इससे प्राप्त जैविक खाद अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन रही है।

समग्र और टिकाऊ मॉडल

यह परियोजना सौर ऊर्जा और बायो-सीएनजी के एकीकृत उपयोग पर आधारित है, जो न केवल ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाता है, बल्कि डीज़ल और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता भी कम करता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर यह मॉडल एक सतत और पर्यावरण-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है।

कंपनी का दृष्टिकोण

टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड के सीईओ मनोज गुप्ता के अनुसार हमारा लक्ष्य स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के माध्यम से ग्रामीण समुदायों में दीर्घकालिक बदलाव लाना है। पसका माइक्रोग्रिड यह दिखाता है कि एकीकृत रिन्यूएबल समाधान किस तरह स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकते हैं और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
Sbbs

विस्तार योग्य मॉडल

यह परियोजना ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए एक स्केलेबल मॉडल के रूप में उभर रही है, जो आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भी है।

Tags