खेल-खेल में विज्ञान और गणित सिखाकर बच्चों में जगा रहे नवाचार की अलख, शिक्षक के प्रयासों से कई उपलब्धियां हासिल
शिक्षक दिवस विशेष | हर बच्चे में छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देना ही एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान है। आज जब शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच विकसित करना है, ऐसे में नवाचार आधारित शिक्षण का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी सोच के साथ बच्चों को खेल-खेल में विज्ञान और गणित पढ़ाने वाले शिक्षक ने शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय पहल की हैं।
इनकी शिक्षण पद्धति में बच्चों को विषय रटने के बजाय उसे समझने और व्यवहारिक जीवन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाता है। विज्ञान और गणित को रोचक गतिविधियों, प्रयोगों और संवाद के माध्यम से पढ़ाने के कारण बच्चे कठिन अवधारणाओं को भी आसानी से समझ पाते हैं।
खेल और नवाचार के जरिए आसान बनाई पढ़ाई
शिक्षण कार्य के दौरान बच्चों को विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों और प्रयोगों का सहारा लिया जाता है। विज्ञान कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को मॉडल और मशीन तैयार करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक से परिचित कराया गया।
बच्चों ने एआई रोबोट, कचरे से विद्युत उत्पादन की तकनीक, विद्यालय की सफाई करने वाली मशीन और स्मार्ट डस्टबिन जैसे विभिन्न नवाचारी मॉडल तैयार किए। इन प्रयासों ने बच्चों में वैज्ञानिक सोच और समस्या के समाधान की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इनमें से कई मॉडलों का चयन राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी और समग्र शिक्षा अभियान की विज्ञान प्रदर्शनी के लिए भी हुआ।
शैक्षिक वीडियो के जरिए प्रदेश के बच्चों तक पहुंची सीख
विज्ञान और गणित को सरल तरीके से समझाने के उद्देश्य से तैयार किए गए शैक्षिक वीडियो उत्तर प्रदेश दूरदर्शन, ई-विद्या और स्वयंप्रभा चैनलों पर भी प्रसारित हुए। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को निशुल्क शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिली।
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करके शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से बाहर तक पहुंचाया जा सकता है।
इंस्पायर अवार्ड योजना में विद्यार्थियों की उपलब्धि
बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत विद्यार्थियों को लगातार प्रेरित किया गया। अब तक आठ बच्चों को इस योजना के तहत चयनित होने पर कुल 80 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है।
इसके अलावा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत भी आठ बच्चों का चयन हुआ, जिन्हें 4-4 हजार रुपये की सहायता राशि मिली। विद्यार्थियों को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराने के साथ-साथ शैक्षिक भ्रमण के अवसर भी उपलब्ध कराए गए, ताकि वे अपने अनुभवों का विस्तार कर सकें।
विज्ञान प्रदर्शनी के लिए तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स में से एक बच्चे का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए भी हुआ, जो विद्यालय और विद्यार्थियों के लिए गौरव की बात है।
पढ़ाई के साथ जागरूकता अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी
शिक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के साथ विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इनमें सड़क सुरक्षा, मेरी माटी मेरा देश, स्वच्छता एवं सुरक्षा जैसे अभियान प्रमुख रहे।
इसके अलावा एफएलएम से संबंधित क्रियात्मक गतिविधियों, क्विज, निबंध, पेंटिंग और पोस्टर प्रतियोगिताओं तथा विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन कराया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता के साथ सामाजिक जागरूकता और सहभागिता की भावना विकसित करना रहा।
विज्ञान और गणित की पुस्तकों का भी किया लेखन
शिक्षण के अनुभवों को व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए विज्ञान और गणित विषय से संबंधित पुस्तकों का लेखन एवं प्रकाशन भी कराया गया। इससे विद्यार्थियों को विषयों को सरल और गतिविधि आधारित तरीके से समझने में मदद मिलती है।
शिक्षण पद्धति को बेहतर बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश (SCERT) की राज्य स्तरीय आदर्श पाठ योजना प्रतियोगिता में चतुर्थ और षष्ठम आदर्श पाठ योजना प्रतियोगिता के अंतर्गत राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुआ।
लेखन के क्षेत्र में भी मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
शिक्षण के साथ-साथ सामाजिक और शैक्षिक विषयों पर लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान दिया गया। ‘दिव्यांग विमर्श’, ‘राष्ट्रीय और शिक्षा’ तथा ‘भारतीय समाज और राम का स्वरूप’ जैसे विषयों पर लिखे गए लेखों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
उत्कृष्ट लेखन के लिए नेपाल और थाईलैंड में भी सम्मान प्राप्त हुआ। इसके अलावा प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रधर्म’ मासिक पत्रिका में भी समय-समय पर लेख प्रकाशित होते रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए रोपे एक हजार पौधे
शिक्षा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए शिक्षक ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर पौधरोपण अभियान भी चलाया। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से अब तक स्वयं और बच्चों के सहयोग से करीब एक हजार पौधे रोपे जा चुके हैं।
इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को केवल किताबों में पर्यावरण संरक्षण पढ़ाने के बजाय उसे अपने व्यवहार और जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया।
शिक्षक दिवस पर ऐसे शिक्षकों को सलाम
एक शिक्षक का काम केवल बच्चों को पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि उनमें सवाल पूछने की आदत, प्रयोग करने का साहस और समाज के प्रति जिम्मेदारी पैदा करना भी है। खेल-खेल में विज्ञान और गणित की शिक्षा, नवाचार आधारित गतिविधियां, विज्ञान प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की भागीदारी, लेखन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे प्रयास शिक्षा को एक व्यापक स्वरूप देते हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसे शिक्षकों के योगदान को नमन करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उनकी मेहनत से विद्यार्थी केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले नहीं, बल्कि सोचने, समझने, प्रयोग करने और समाज के लिए कुछ नया करने वाले नागरिक बनते हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

