केकेसी में 24वीं युवा सांस्कृतिक प्रतियोगिता ‘दिव्यांकुर-2026’ का समापन, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने किया सम्मानित

संस्कार और कौशल से समृद्ध युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण का आधार: योगेंद्र उपाध्याय

20 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने 22 सांस्कृतिक स्पर्धाओं में दिखाई प्रतिभा

 
केकेसी में 24वीं युवा सांस्कृतिक प्रतियोगिता ‘दिव्यांकुर-2026’ का समापन, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने किया सम्मानित

लखनऊ, नवंबर 2026। जय नारायण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय (केकेसी), लखनऊ में आयोजित 24वीं वार्षिक अंतर महाविद्यालयी युवा सांस्कृतिक प्रतियोगिता ‘दिव्यांकुर-2026’ का मंगलवार को समापन हुआ। चार दिवसीय इस आयोजन के समापन समारोह में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पदक, प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष गोपाल नारायण मिश्र ने की।

समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि संस्कार और कौशल से समृद्ध युवा शक्ति ही प्रबुद्ध, समर्थ और आदर्श समाज के निर्माण का आधार है। ऐसी युवा शक्ति राष्ट्रहित में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में कई व्यावहारिक और नवाचारी प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो राष्ट्र एवं समाज के दीर्घकालिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और युवाओं के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करते हैं।

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उन्होंने युवाओं से किसी न किसी कला विधा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि कला व्यक्ति को पशुता से मानवता की ओर ले जाती है और सभ्य एवं संवेदनशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संस्कारों के अभाव में युवा दिशाहीन हो सकते हैं, जबकि सांस्कृतिक आयोजनों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सैकड़ों वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं के हमलों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक पहचान, जीवन मूल्य और मूल संस्कार अक्षुण्ण रहे। भारतीय संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इसकी परंपरा आज भी विश्वभर में फल-फूल रही है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति, राष्ट्र और समाज पर गर्व करने की अपील की। साथ ही ज्ञान, विज्ञान, कला और कौशल के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले युवाओं की प्रतिभा की सराहना की।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद इतिहासकार एवं अभिनेता डॉ. रवि भट्ट ने महाविद्यालय के पूर्व छात्र के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को भाषा, व्याकरण और संवाद कौशल में दक्षता हासिल करने की सलाह दी। वहीं, उच्च शिक्षा के संयुक्त निदेशक प्रो. बी.एल. शर्मा ने जीवन जीने की कला पर विचार रखते हुए कहा कि अधिक से अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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महाविद्यालय की सांस्कृतिक समिति की संयोजक प्रो. अलका शर्मा ने चार दिवसीय आयोजन की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद 20 से अधिक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने 22 विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के.के. शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रो. वंदना सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि संचालन डॉ. विजय राज श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर लुआक्टा अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडेय, महाविद्यालय के शिक्षक, सांस्कृतिक समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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