27 मई को मनाई जाएगी ग्रापए के संस्थापक बालेश्वर लाल की 39वीं पुण्यतिथि, 'ग्रामीण पत्रकारिता दिवस' के रूप में सजेगा मंच

Ballia: The 39th death anniversary of GRAPA founder Baleshwar Lal will be observed on May 27; the occasion will be celebrated as 'Rural Journalism Day'.
 
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Rural Journalist Association Foundation Day Ballia: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में ग्रामीण पत्रकारिता की मजबूत नींव रखने वाले 'ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन' (ग्रापए) के संस्थापक, स्मृति शेष बालेश्वर लाल की 39वीं पुण्यतिथि आगामी 27 मई (बुधवार) को बेहद गरिमापूर्ण ढंग से मनाई जाएगी। इस विशेष दिन को संगठन द्वारा 'ग्रामीण पत्रकारिता दिवस' के रूप में आयोजित किया जा रहा है। यह भव्य स्मृति समारोह बुधवार शाम 4:00 बजे से बालेश्वर लाल मार्ग, पोखरा (गड़वार) स्थित परिसर में शुरू होगा।

पीठाधीश्वर कौशलेन्द्र गिरी होंगे मुख्य अतिथि

ग्रापए के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष आयोजित होने वाले समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध श्रीनाथ बाबा मंदिर के पीठाधीश्वर महंत कौशलेन्द्र गिरी जी महाराज होंगे।

समारोह की मुख्य रूपरेखा और पदाधिकारी:

  • समारोह की अध्यक्षता: ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश द्विवेदी करेंगे।

  • मंच का संचालन: क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश चंद त्रिपाठी द्वारा किया जाएगा।

  • मुख्य वक्ता: पूर्वांचल के विख्यात साहित्यकार और लोकप्रिय हास्य कवि भोला प्रसाद 'आग्नेय' अपने विचारों से समां बांधेंगे।

  • स्वागताध्यक्ष: एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सौरभ कुमार आगंतुकों का स्वागत करेंगे।

विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज विभूतियों का होगा सम्मान

ग्रामीण पत्रकारिता दिवस के इस पावन अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को मंच पर सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।

इस गौरवमयी समारोह में हिस्सा लेने के लिए जिले और राज्य स्तर के पत्रकारों, प्रबुद्ध साहित्यकारों, कवियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं, पूर्व सैनिकों सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

ग्रापए बलिया के तत्वावधान में होने वाला यह वार्षिक आयोजन न केवल संस्थापक बालेश्वर लाल के ग्रामीण पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करने का जरिया है, बल्कि यह आंचलिक पत्रकारों को प्रोत्साहित करने और सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने का एक बड़ा मंच बन चुका है।

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