सालार गंज के सालाना उर्स में सजा शानदार ऑल इंडिया मुशायरा, नामवर शायरों ने बांधा समां

A spectacular All India Mushaira was organized in the annual Urs of Salar Ganj, renowned poets graced the occasion.
 
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Sitapur जनपद की तहसील बिसवां स्थित ऐतिहासिक मौजा सालार गंज में सालाना उर्स के अवसर पर भव्य ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस अदबी आयोजन में देश के विभिन्न शहरों से आए मशहूर शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुशायरे की सदारत वरिष्ठ शायर Mohan Muntazir ने की, जबकि निज़ामत की जिम्मेदारी Asim Kakorvi ने निभाई। कार्यक्रम का आयोजन Fakhr Hindustan Foundation के बैनर तले किया गया।

मेहमानों का गर्मजोशी से हुआ स्वागत

मुशायरे के ऑर्गेनाइज़र Arif Alvi और कन्वीनर Mohammad Arif ने सभी मेहमानों का शॉल और फूल भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में Rizwan Ahmad और समाजसेवी Saeed Hashmi विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं भोजपुरी फिल्म अभिनेता Sangram Patel सहित कई सामाजिक हस्तियों ने भी शिरकत की।

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शायरों के अशआर पर गूंजती रही दाद

मुशायरे में प्रस्तुत अशआर ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कुछ चर्चित अशआर इस प्रकार रहे—

“रंग-बिरंगे बाग में देखो जादू रोके बैठे हैं
फूल खिले हैं लेकिन अपनी खुशबू रोके बैठे हैं”
— मोहन मुन्तज़िर

“फसाद करके जो बैठे हैं अपनी कुर्सी पे
उन्हें बताओ कि मौसम बदलने वाला है”
— अकमल बलरामपुरी

“उम्र की आख़िरी मंज़िल पे पहुंचकर वालिद
बोझ बन जाता है क्यों बोझ उठाने वाला”
— यासीन इब्न उमर

“मुहब्बत में ये दिल मैं हार बैठा
ये समझो कि शहादत हो गई है”
— आसिम काकोरवी

“मशवरा मेरा ये है बार-बार रहना है
मतलबी ज़माना है होशियार रहना है”
— अमजद खान अमजद

“आप हैं साथ किसी शै की ज़रूरत कैसी है
प्यार से बढ़कर भला और है दौलत कैसी है”
— सना महमूदाबादी

“चाहती है ये शगुफ्ता तेरा दर रौशन हो,
मेरा दिल है कि तेरे हक में दुआ चाहता है”
— शगुफ्ता अंजुम

इसके अलावा सुहैल आतिर, ग़फरान चलबली, सतीम रोशन, हाफिज अशफाक, अफ्फान सीतापुरी और गुलज़ार खैराबादी सहित कई शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए।

मेहमानों का गर्मजोशी से हुआ स्वागत

मुशायरे के ऑर्गेनाइज़र Arif Alvi और कन्वीनर Mohammad Arif ने सभी मेहमानों का शॉल और फूल भेंट कर स्वागत किया।

कार्यक्रम में Rizwan Ahmad और समाजसेवी Saeed Hashmi विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं भोजपुरी फिल्म अभिनेता Sangram Patel सहित कई सामाजिक हस्तियों ने भी शिरकत की।

शायरों के अशआर पर गूंजती रही दाद

मुशायरे में प्रस्तुत अशआर ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कुछ चर्चित अशआर इस प्रकार रहे—

“रंग-बिरंगे बाग में देखो जादू रोके बैठे हैं
फूल खिले हैं लेकिन अपनी खुशबू रोके बैठे हैं”
— मोहन मुन्तज़िर

“फसाद करके जो बैठे हैं अपनी कुर्सी पे
उन्हें बताओ कि मौसम बदलने वाला है”
— अकमल बलरामपुरी

“उम्र की आख़िरी मंज़िल पे पहुंचकर वालिद
बोझ बन जाता है क्यों बोझ उठाने वाला”
— यासीन इब्न उमर

“मुहब्बत में ये दिल मैं हार बैठा
ये समझो कि शहादत हो गई है”
— आसिम काकोरवी

“मशवरा मेरा ये है बार-बार रहना है
मतलबी ज़माना है होशियार रहना है”
— अमजद खान अमजद

“आप हैं साथ किसी शै की ज़रूरत कैसी है
प्यार से बढ़कर भला और है दौलत कैसी है”
— सना महमूदाबादी

“चाहती है ये शगुफ्ता तेरा दर रौशन हो,
मेरा दिल है कि तेरे हक में दुआ चाहता है”
— शगुफ्ता अंजुम

इसके अलावा सुहैल आतिर, ग़फरान चलबली, सतीम रोशन, हाफिज अशफाक, अफ्फान सीतापुरी और गुलज़ार खैराबादी सहित कई शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए।

शगुफ्ता अंजुम ने जीता दिल

मुशायरे की खास आकर्षण युवा शायरा Shagufta Anjum रहीं। उन्होंने अपनी ग़ज़लों, गीतों और पूरबी अंदाज़ की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर तक उनकी प्रस्तुति में डूबे रहे। सामईन की फरमाइश पर उन्होंने अपनी लोकप्रिय ग़ज़लें सुनाईं, जिन्हें भरपूर दाद मिली। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति के साथ-साथ आयोजकों के बेहतरीन चयन की भी सराहना की। कार्यक्रम के अंत में कन्वीनर मोहम्मद आरिफ ने सभी मेहमानों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

मुशायरे की खास आकर्षण युवा शायरा Shagufta Anjum रहीं। उन्होंने अपनी ग़ज़लों, गीतों और पूरबी अंदाज़ की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर तक उनकी प्रस्तुति में डूबे रहे। सामईन की फरमाइश पर उन्होंने अपनी लोकप्रिय ग़ज़लें सुनाईं, जिन्हें भरपूर दाद मिली। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति के साथ-साथ आयोजकों के बेहतरीन चयन की भी सराहना की। कार्यक्रम के अंत में कन्वीनर मोहम्मद आरिफ ने सभी मेहमानों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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