छोटी चींटी की बड़ी सीख
हरिश्चंद्र सिंह चौहान (लेखक) एक घने जंगल में एक छोटी-सी चींटी रहती थी। वह बहुत मेहनती और हिम्मती थी। वह रोज सुबह जल्दी उठती और भोजन की तलाश में निकल जाती। दिनभर मेहनत करने के बाद वह अपने बिल में लौट आती।
एक दिन भोजन की तलाश करते हुए उसे रास्ते में रोटी का एक बड़ा टुकड़ा दिखाई दिया। रोटी का टुकड़ा इतना बड़ा था कि उसे देखकर चींटी कुछ पल के लिए सोच में पड़ गई। वह अकेली थी, फिर भी उसने हिम्मत नहीं छोड़ी।चींटी ने खुद से कहा, “मैं छोटी जरूर हूं, लेकिन कोशिश करने से पीछे नहीं हटूंगी।”
उसने रोटी के टुकड़े को पूरी ताकत से खींचना शुरू किया। लेकिन रोटी का टुकड़ा बहुत भारी था और वह उसे अकेले नहीं खींच पा रही थी। तब चींटी ने अपनी सहेलियों को मदद के लिए बुलाया।कुछ ही देर में कई चींटियां वहां पहुंच गईं। सभी ने मिलकर रोटी के टुकड़े को खींचना शुरू किया। थोड़ी मेहनत और आपसी सहयोग के बाद वे रोटी को अपने बिल तक ले जाने में सफल हो गईं।
पास के पेड़ पर बैठी एक चिड़िया यह सब देख रही थी। उसने हैरानी से कहा, “वाह! इतनी छोटी-छोटी चींटियां और इतना बड़ा काम!”चींटियों में से एक मुस्कुराई और बोली, “हम छोटी जरूर हैं, लेकिन हमारे साथ एकता है, मेहनत है और हम कभी हार नहीं मानते। यही हमारी असली ताकत है।”
चिड़िया ने चींटियों की बात ध्यान से सुनी और कहा, “आज तुमने मुझे एक बड़ी सीख दी है। जब हम मिलकर काम करते हैं तो मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान हो जाता है।”उस दिन के बाद जंगल के सभी जानवर चींटियों की मेहनत, एकता और हिम्मत की प्रशंसा करने लगे।
सीख
मेहनत, एकता और धैर्य से कोई भी कठिन काम आसान बनाया जा सकता है। इसलिए मुश्किलों से घबराने के बजाय मिलकर प्रयास करते रहना चाहिए।
