ओबीसी की सही जातिवार जनगणना की मांग तेज, बुद्धिजीवी वर्ग आया आगे

Demand for Accurate Caste-based Census of OBCs Intensifies; Intellectuals Step Forward
 
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लखनऊ। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सटीक जातिवार जनगणना की मांग को लेकर अब बुद्धिजीवी वर्ग खुलकर सामने आ रहा है। इस मुद्दे पर ‘सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच’ ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक मंथन किया और सरकार से स्पष्ट व्यवस्था की मांग उठाई।

मंच के महामंत्री जगदीश शरण गंगवार ने प्रेस वार्ता में बताया कि संगठन पिछले आठ वर्षों से पूर्व सैन्य अधिकारियों, प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं और व्यापारियों जैसे बुद्धिजीवी वर्ग के साथ मिलकर सामाजिक सुधार के मुद्दों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज की जनसंख्या 12 प्रतिशत से अधिक है और यह समाज करीब 300 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

मंच ने वर्ष 2026 की प्रस्तावित जनगणना के प्रारूप पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जनगणना फॉर्म के एक कॉलम में अनुसूचित जाति/जनजाति का तो उल्लेख है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से स्पष्ट कॉलम नहीं दिया गया है। इससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या का सही आकलन संभव नहीं हो पाएगा, जो सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ी बाधा बन सकता है।

इस मुद्दे पर मंच से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भी अपनी राय रखी। इनमें पूर्व आईएएस अरुण कुमार सिन्हा, अध्यक्ष डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार, रवीन्द्र सिंह गंगवार, वी.आर. वर्मा, मुनीश गंगवार, आर.एल. निरंजन और योगेंद्र सचान सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

मंच ने सरकार से मांग की है कि जनगणना में OBC वर्ग के लिए अलग कॉलम अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए, ताकि जातिवार आंकड़े स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से सामने आ सकें। साथ ही कुर्मी समाज के लोगों से अपील की गई है कि वे जनगणना के दौरान अपनी उपजाति के साथ “कुर्मी” शब्द अवश्य दर्ज कराएं, जिससे समाज की वास्तविक जनसंख्या और प्रभाव का सही आकलन हो सके।

इस अभियान को अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा, कुर्मी सभा लखनऊ, छत्रपति शिवाजी संस्थान कानपुर और सरदार वल्लभभाई पटेल ट्रस्ट लखनऊ जैसे कई संगठनों का समर्थन मिल रहा है।

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