अनहद की अनुगूंज: युवाओं के दिलों में शास्त्रीय संगीत का नया स्वर; स्पिक मकै और एसबीआई पेमेंट्स की अनूठी पहल
मुंबई (अनिल बेदाग) | 31 मार्च 2026
मुंबई और पुणे की फिजाओं में गूंजती रागों की मधुर ध्वनि इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ें आज भी उतनी ही गहरी और प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं। स्पिक मकै (SPIC MACAY) द्वारा आयोजित दो-दिवसीय संगीत समारोह ‘अनहद’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त 'सांस्कृतिक सेतु' बनकर उभरा है।
शिक्षा और संस्कृति का संगम
एसबीआई पेमेंट्स (SBI Payments) के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव ने शास्त्रीय संगीत को स्कूलों और कॉलेजों तक पहुँचाने के मिशन को एक नई ऊंचाई दी है। आंकड़ों की बात करें तो:
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मुंबई: पिछले एक वर्ष में 75 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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पुणे: 100 से ज्यादा सफल आयोजनों के जरिए छात्रों को संगीत की बारीकियों से रूबरू कराया गया।
यह सक्रियता साबित करती है कि यदि युवाओं को सही मंच और मार्गदर्शन मिले, तो वे आज के 'डिजिटल शोर' के बीच भी राग-रागिनियों की गहराई और सुकून को सराहने के लिए तत्पर हैं।
मंच पर दिग्गजों का जादू
‘अनहद’ के मंच पर देश के नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से न केवल संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी संवेदनशीलता और सौंदर्यबोध (Aesthetics) को भी जागृत किया।
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आध्यात्मिक ऊर्जा: सुरों की आध्यात्मिक शक्ति और ताल की जटिलताओं ने दर्शकों को एक अनोखे ध्यानपूर्ण अनुभव से जोड़ा।
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संवेनशीलता: स्पिक मकै का यह प्रयास शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे सांस्कृतिक समृद्धि से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विरासत से प्रेरणा तक का सफर
‘अनहद’ जैसे आयोजन समाज को यह कड़ा संदेश देते हैं कि शास्त्रीय संगीत केवल 'अतीत की धरोहर' नहीं है, बल्कि यह भविष्य की प्रेरणा भी है। यह संगीत नई पीढ़ी को अधिक संवेदनशील, रचनात्मक और जागरूक इंसान बनने की राह दिखाता है।
