भोजपुरी लोकगीतों की मधुर गूंज के साथ संपन्न हुई लोक गायन कार्यशाला, ‘नाहीं जानी कौने बतिया पर खफा रसिया’ ने मोहा मन
इमेज एंड क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी की पहल पर 3 अक्टूबर से चल रही कार्यशाला का समापन; प्रतिभागियों और संगतकारों को प्रमाणपत्र व प्रतीक चिह्न देकर किया गया सम्मानित
लखनऊ, 12 अक्टूबर 2026। भोजपुरी लोकगीतों की मिठास, पारंपरिक धुनों और लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत से सजे कार्यक्रम में इमेज एंड क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी की भोजपुरी लोक गायन कार्यशाला का समापन हुआ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का समापन समारोह सोमवार को गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। वरिष्ठ भोजपुरी लोक गायक अवधेश कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में 3 अक्टूबर से संचालित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों ने भोजपुरी की विभिन्न पारंपरिक गायन विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समारोह में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह मुख्य अतिथि तथा उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार विद्या बिंदु सिंह और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय सहित कई गणमान्य लोग भी इस सांस्कृतिक आयोजन में उपस्थित रहे।
देवी गीत से निर्गुण तक, लोक विधाओं की सजी सुरमयी महफिल
समापन समारोह की शुरुआत देवी गीत ‘अपने बचपन के…’ की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद प्रतिभागियों ने सोहर, लोकगीत, पूर्वी भजन, कजरी, छठ गीत, पचरा, बिरहा, दादरा और निर्गुण जैसी पारंपरिक विधाओं में अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में ‘बलमा सुतेला सुख…’ सोहर, ‘काहे बतिया ई हमसे…’ लोकगीत, ‘नाहीं जानी कौने बतिया पर खफा रसिया…’ पूर्वी भजन, ‘माँगे ननदिया कंगनवां…’ कजरी, ‘पनवां से पातर…’ छठ गीत, ‘बेरिया की बेरी…’ पचरा तथा ‘रोज रतिया निहोरे नयनवां…’ बिरहा एवं दादरा की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को लोक संगीत की विविध रंगत से परिचित कराया। निर्गुण गायन में ‘तोरा टूटि जाइहैं नथुनी…’ की प्रस्तुति भी सुनने को मिली।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी तैयारी, सुरों पर पकड़ और पारंपरिक गायन शैलियों की समझ का परिचय दिया। भोजपुरी लोक संगीत की सहजता, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक विविधता ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
20 प्रतिभागियों ने दिखाया गायन कौशल
कार्यशाला में अनुराधा यादव, शालिनी साहू, नीलिमा सिंह, डॉ. रश्मि उपाध्याय, आभा दीक्षित, भारती वर्मा, शांभवी मिश्रा, बीना त्रिपाठी, मनु रॉय, सोनी श्रीवास्तव, आरती शुक्ला, ऋतु करमचंदानी, सुनीता जैसवाल, अजय पासवान, अलका चतुर्वेदी, किरण सोनी, रजनी सिंह, सीमा अग्रवाल, श्रुति मालवीय और सुनीता चौरसिया ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने विभिन्न लोक विधाओं में सीखे गए गायन कौशल को मंच पर प्रस्तुत किया। उनके प्रदर्शन ने कार्यशाला के दौरान हुए अभ्यास और प्रशिक्षण की झलक पेश की।
वाद्य संगत ने प्रस्तुतियों में भरे रंग
कार्यक्रम में तबले पर पंडित अनिल महाराज, ऑर्गन पर पंडित चंद्रेश पांडेय, ऑक्टोपैड पर हर्षित मिश्रा और नगाड़े पर दीन मोहम्मद ने संगत की। वाद्य कलाकारों की संगत ने लोकगीतों की लय और भाव को प्रभावशाली बनाया तथा प्रस्तुतियों को संगीतमय विस्तार दिया। समारोह के दौरान कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों और संगतकारों को प्रमाणपत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
इमेज एंड क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी के आयोजक कमलेश कुमार पाठक और संयोजिका कविता पाठक के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य भोजपुरी लोक संगीत की पारंपरिक विधाओं का संरक्षण करना, नई पीढ़ी को लोक संस्कृति की विरासत से जोड़ना तथा उभरते कलाकारों को प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराना था।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को भोजपुरी गायन की विविध शैलियों को सीखने और उन्हें सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला। आयोजन ने इस बात को रेखांकित किया कि लोक संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भाषा, परंपरा, सामाजिक स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण विरासत भी है।
समापन समारोह में प्रस्तुत लोकगीतों और भजनों ने भोजपुरी संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में सामने रखा। ऐसे आयोजन पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ नए कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
