'हमारी मिट्टी की खुशबू ही हमारी पहचान': 'माटी-9' महोत्सव में बोले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

र्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पैतृक जड़ों से जुड़ाव को समर्पित 'माटी-9' महोत्सव में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। "माटी" (मिट्टी) के प्रति सम्मान और अपनी पहचान को संजोने का यह संदेश आज के वैश्विक युग में अत्यंत प्रासंगिक है।
 
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नई दिल्ली/पूर्वांचल डेस्क | 01 अप्रैल 2026

लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज पूर्वांचल की कला, संस्कृति, खान-पान और गौरवशाली विरासत को समर्पित भव्य महोत्सव 'माटी-9' को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वांचल क्षेत्र के लोगों और उनकी पैतृक जड़ों के बीच के अटूट संबंध की सराहना करते हुए इसे भारत की आध्यात्मिक पहचान का आधार बताया।

पूर्वांचल की "माटी": परंपरा और जीवंतता का प्रतीक

महोत्सव के "माटी" (मिट्टी) विषय पर बल देते हुए श्री बिरला ने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी केवल एक भौगोलिक तत्व नहीं है, बल्कि यह लचीलेपन, अटूट परंपरा और जीवंत सामुदायिक भावना का जीता-जागता प्रतीक है। उन्होंने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा हमारी मिट्टी की खुशबू ही हमारी असली पहचान को परिभाषित करती है। पूर्वांचल ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को गढ़ने में जो योगदान दिया है, वह अद्वितीय है।"

युवा पीढ़ी के लिए संदेश: 'जड़ों से जुड़ाव ही सच्ची सफलता'

श्री बिरला ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 'माटी-9' जैसे उत्सवों की आज के समय में अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की:

  • वैश्विक सफलता और जड़ें: युवा भले ही वैश्विक स्तर पर सफलता के झंडे गाड़ें, लेकिन उन्हें अपनी जड़ों और संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए।

  • सांस्कृतिक निरंतरता: ऐसे आयोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व करना सीखे और उसे आगे बढ़ाए।

महोत्सव के मुख्य आकर्षण

'माटी-9' महोत्सव पूर्वांचल की विविधता को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास है, जिसमें शामिल हैं:

  1. कला और हस्तशिल्प: स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई दुर्लभ कलाकृतियों की प्रदर्शनी।

  2. खान-पान (Cuisine): पूर्वांचल के पारंपरिक स्वादों का लुत्फ उठाने का अवसर।

  3. पर्यटन और विरासत: क्षेत्र की ऐतिहासिक और पर्यटन संभावनाओं को प्रदर्शित करने वाली गैलरी।

    पूर्वांचल की "माटी": परंपरा और जीवंतता का प्रतीक

    महोत्सव के "माटी" (मिट्टी) विषय पर बल देते हुए श्री बिरला ने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी केवल एक भौगोलिक तत्व नहीं है, बल्कि यह लचीलेपन, अटूट परंपरा और जीवंत सामुदायिक भावना का जीता-जागता प्रतीक है। उन्होंने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा हमारी मिट्टी की खुशबू ही हमारी असली पहचान को परिभाषित करती है। पूर्वांचल ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को गढ़ने में जो योगदान दिया है, वह अद्वितीय है।"

    युवा पीढ़ी के लिए संदेश: 'जड़ों से जुड़ाव ही सच्ची सफलता'

    श्री बिरला ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 'माटी-9' जैसे उत्सवों की आज के समय में अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की:

  4. वैश्विक सफलता और जड़ें: युवा भले ही वैश्विक स्तर पर सफलता के झंडे गाड़ें, लेकिन उन्हें अपनी जड़ों और संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए।

  5. सांस्कृतिक निरंतरता: ऐसे आयोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व करना सीखे और उसे आगे बढ़ाए।

  6. 'माटी-9' महोत्सव पूर्वांचल की विविधता को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास है, जिसमें शामिल हैं:

  7. कला और हस्तशिल्प: स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई दुर्लभ कलाकृतियों की प्रदर्शनी।

  8. खान-पान (Cuisine): पूर्वांचल के पारंपरिक स्वादों का लुत्फ उठाने का अवसर।

  9. पर्यटन और विरासत: क्षेत्र की ऐतिहासिक और पर्यटन संभावनाओं को प्रदर्शित करने वाली गैलरी।

  10. महोत्सव के मुख्य आकर्षण

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