राजनीति का मानवीय चेहरा: जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जगाई कैंसर पीड़ित के जीवन की उम्मीद
मंदिर निरीक्षण के दौरान सामने आई बुजुर्ग की बेबसी
यह घटना मुंगेर जिले के टेटिया बंबर प्रखंड के देवघरा में स्थित ऐतिहासिक उच्चेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशासनिक अमले के साथ मंदिर परिसर का जायजा ले रहे थे। इसी बीच सुरक्षा घेरे और भारी भीड़ में उनकी नज़र एक 65 वर्षीय बुजुर्ग पर थमी। यह बुजुर्ग भंडार गांव के रहने वाले राजेंद्र यादव थे, जो लंबे समय से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी और असहनीय आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। तंगहाली के कारण वे अपनी जिंदगी और इलाज की आस लगभग छोड़ चुके थे।
प्रोटोकॉल तोड़कर सुनी पीड़ित की पुकार
मुख्यमंत्री को अपने करीब पाकर राजेंद्र यादव ने हाथ जोड़कर अपनी बेबसी बयां की और इलाज के लिए गुहार लगाई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना किसी वीआईपी औपचारिकता के उन्हें अपने पास बुलाया और उनकी पूरी बात को बेहद शालीनता और धैर्य के साथ सुना।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से मौके पर मौजूद जिला पदाधिकारी (DM) निखिल धनराज निप्पाणीकर को कड़े निर्देश दिए:
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राजेंद्र यादव को पूरी तरह से निःशुल्क (Free) और उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए।
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इलाज की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर प्रशासनिक कोताही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उनके ऑपरेशन और दवाओं का पूरा प्रबंध सरकार करेगी।
सुशासन और संवेदनशीलता का संदेश
यह त्वरित फैसला सिर्फ एक कागजी आदेश नहीं, बल्कि लोकतंत्र के उसूलों की जीवंत मिसाल है। जब सरकार का मुखिया खुद किसी अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की तकलीफ को दूर करने के लिए आगे आता है, तो पूरा प्रशासनिक अमला भी जनसेवा के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील बनता है।
मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद राजेंद्र यादव की आँखों में जीने की एक नई उम्मीद दिखाई दी। उन्होंने भावुक होकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय जनता ने भी मुख्यमंत्री की इस तत्परता की खुलकर तारीफ की। लोगों का मानना है कि ऐसे कदम जनता और सरकार के बीच की दूरी को पाटते हैं और व्यवस्था में भरोसा बहाल करते हैं।
"सुशासन की असली पहचान केवल बड़ी योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और असहाय व्यक्ति की आँखों में उम्मीद की किरण लौटाना है।"
आज के दौर में जहाँ राजनीतिक विमर्श अक्सर आरोपों और दावों तक सिमट जाता है, मुंगेर की यह घटना एक सुखद अहसास कराती है। बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और गरीबों तक इलाज पहुँचाने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिया गया यह फैसला इन सभी सरकारी प्रयासों को एक संवेदनशील मानवीय स्पर्श देता है।
