राजनीति में यायावरी का असीम आनंद और हृदय परिवर्तन का 'खेल'
लेखक: सुधाकर आशावादी (विनायक फीचर्स)
प्राकृतिक वातावरण में घुमक्कड़ी करने वाले को हम 'यायावर' कहते हैं, लेकिन जब यही प्रवृत्ति राजनीति के गलियारों में दिखने लगती है, तो दुनिया उसे 'दलबदलू' का ठप्पा लगा देती है। राजनीति में हृदय परिवर्तन होना कोई नई बात नहीं है, और सच तो यह है कि यहाँ हृदय कब, किस ओर धड़कने लगे, इसका पूर्वानुमान मौसम विभाग भी नहीं लगा सकता।
सत्ता की शतरंज और अवसरवाद का हुनर
राजनीति की शतरंज में कौन सा प्यादा कब वजीर बन जाए, यह स्वयं उस प्यादे को भी नहीं पता होता। इस खेल में लंबी पारी खेलने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का हुनर आना अनिवार्य है। एक महत्वाकांक्षी राजनेता की रग-रग में 'मौकापरस्ती' का संचार होना चाहिए। सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने का तिकड़मी व्याकरण कहता है कि जिस कंधे को सीढ़ी बनाया जाए, समय आने पर सबसे पहले उसी को नकारना चाहिए, ताकि नए कंधों के सहारे कुर्सी का सफर जारी रहे।
साधन और साध्य का गणित
जीवन और सियासत के सफर में बड़ी समानता है। किसी गंतव्य तक पहुँचने के लिए साधन अपनाने ही पड़ते हैं और ये साधन पूरी तरह से परिस्थितिजन्य होते हैं। यदि जेब भारी हो तो सफर आसान है, लेकिन सीमित संसाधनों के बीच लक्ष्य तक पहुँचना हो तो सार्वजनिक साधनों (दलों) का सहारा लेना मजबूरी बन जाता है। इस सफर में निष्ठा, समर्पण, विश्वसनीयता और त्याग जैसे नैतिक मूल्यों का बाजार भाव शून्य होता है।
खानदानी सियासत और अर्जुन का निशाना
लेखक अपने एक 'खानदानी सियासी' मित्र का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि जब सियासत विरासत में मिलती है, तो योग्यता केवल 'उत्तराधिकारी' होना ही रह जाती है। ऐसे में स्कूली शिक्षा गौण हो जाती है। उन मित्र की सुबह एक दल में होती थी और शाम दूसरे में। दलबदलू बनकर उन्होंने जीवन भर संग्राम किया और अंततः अपने गंतव्य तक पहुँच ही गए।
जब लक्ष्य मछली की आँख पर निशाना साधने जैसा हो, तो सियासत का हर 'अर्जुन' उसी दिशा में बढ़ता है। सत्ता का सफर किसी और दल से शुरू हुआ, महत्वाकांक्षा पूरी नहीं हुई तो कहीं और खिसक गए। फिर 'मैं' से 'हम' हुए और जब वहाँ भी दाल नहीं गली, तो फिर बिस्तर बोरिया बाँध लिया। अंत में एक जगह टिके और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के कंधों को सीढ़ी बनाकर सत्ता के मचान पर चढ़ गए।
कलाकारी और भाग्य का खेल
बार-बार दल बदलना केवल कलाकारी नहीं है। यदि भाग्य साथ दे, तो राजनीति में किसी का भी सितारा कभी भी चमक सकता है। बार-बार 'हृदय परिवर्तन' करने के बदले यहाँ विशिष्ट उपहार (पद और प्रतिष्ठा) मिलते हैं। जैसे प्रकृति में घुमक्कड़ी आनंद देती है, वैसे ही राजनीतिक यायावरी भी व्यक्ति को सत्ता का असीम आनंद प्रदान करती है

