यूपी में न्याय व्यवस्था का होगा डिजिटल कायाकल्प, पुलिस से अदालत तक एक क्लिक पर जुड़ेंगी व्यवस्थाएं
योगी सरकार का डिजिटल एक्शन प्लान तैयार, आईसीजेएस 2.0 और ई-फॉरेंसिक से जांच प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी
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नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस, फॉरेंसिक, अभियोजन और जेलों का होगा तकनीकी आधुनिकीकरण।
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एनसीएल डैशबोर्ड पर यूपी का स्कोर 78.13 से बढ़कर 85.99 अंक पहुंचा।
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ई-फॉरेंसिक 2.0 के तहत जुलाई से अब तक 6,334 केस प्राप्त, 535 मामलों की रिपोर्ट तैयार।
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प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में नेटवर्क कनेक्टिविटी मजबूत करने की तैयारी।
लखनऊ, 5 नवंबर। उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण के साथ न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल एक्शन प्लान पर काम तेज कर दिया है। अब पुलिस थानों से लेकर फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, अभियोजन विभाग, जेलों और न्यायालयों तक सूचनाओं का आदान-प्रदान डिजिटल माध्यम से करने की तैयारी है। इसके लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) को मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस पहल का उद्देश्य अपराध की जांच से लेकर न्यायिक निर्णय तक की प्रक्रिया में तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करना है। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और जांच से जुड़े दस्तावेजों तथा साक्ष्यों का आदान-प्रदान अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
एनसीएल डैशबोर्ड पर यूपी के प्रदर्शन में सुधार
नए आपराधिक कानूनों (एनसीएल) के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने अपने प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया है। 12 सितंबर 2026 के एनसीएल रैंकिंग डैशबोर्ड के अनुसार प्रदेश का कुल स्कोर 85.99 अंक हो गया है, जबकि 25 जून 2026 को यह 78.13 अंक था। इस प्रकार करीब ढाई महीने में स्कोर में 7.86 अंकों की वृद्धि हुई है।डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को प्रदेश का स्कोर 82.05, 19 अगस्त को 84.92 और 1 सितंबर को 85.47 अंक दर्ज किया गया था।
नोटिफिकेशन जारी करने और मॉडल रूल्स लागू करने के मामले में प्रदेश को 10-10 अंक मिले हैं। आईसीजेएस इंटीग्रेशन और MedLEaPR पोर्टल के क्रियान्वयन में भी 10-10 अंक हासिल हुए हैं। वहीं, नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के इस्तेमाल में प्रदेश को निर्धारित पांच में से पांच अंक मिले हैं।ई-साक्ष्य के इस्तेमाल में 10 में से 6.57 अंक और ई-समन में 10 में से 6.74 अंक प्राप्त हुए हैं। न्याय श्रुति के मामले में भी प्रदेश को पांच में से पांच अंक मिले हैं।
इन व्यवस्थाओं की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक माह होने वाली क्राइम मीटिंग में की जा रही है। इसके अलावा ई-साक्ष्य की निगरानी और 60 तथा 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने की प्रगति पर नजर रखने के लिए अलग डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है। न्यायालयों से जुड़े मानकों की समीक्षा को बेहतर बनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी एनसीएल डैशबोर्ड का एक्सेस उपलब्ध कराया गया है।
ई-फॉरेंसिक 2.0 से वैज्ञानिक जांच को मिलेगी गति
अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका मजबूत करने के लिए प्रदेश में ई-फॉरेंसिक 2.0 व्यवस्था लागू की गई है। जुलाई 2026 से शुरू इस प्रणाली के तहत अब तक 6,334 केस प्राप्त हुए हैं, जबकि 535 मामलों की रिपोर्टिंग पूरी की जा चुकी है।
इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए केस का पंजीकरण, आवंटन, जांच रिपोर्ट तैयार करने और रिपोर्ट भेजने जैसे कार्य ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इससे फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने और मामलों की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक कंप्यूटर उपकरणों की उपलब्धता पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश की 12 विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के आठ-आठ अनुभागों के लिए कुल 192 हाई-एंड डेस्कटॉप की आवश्यकता प्रस्तावित की गई है।
इसके अलावा महत्वपूर्ण डिजिटल आंकड़ों और केस से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (एनएएस) अथवा क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई है। थानों और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए सीसीटीएनएस के माध्यम से डाटा एंट्री और क्यूआर कोड जनरेशन की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा रहा है।
1,982 थानों और 18 फॉरेंसिक लैब में बेहतर होगी कनेक्टिविटी
आईसीजेएस 2.0 परियोजना के तहत प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए एसडी-वैन आधारित नेटवर्क व्यवस्था और आवश्यक तकनीकी उपकरणों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। पुलिस विभाग को डेस्कटॉप, यूपीएस, टैबलेट, मल्टीफंक्शन प्रिंटर, वेबकैम और क्यूआर कोड रीडर जैसे उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी है। इन संसाधनों से थानों में डिजिटल कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
जेलों और न्यायालयों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होगी मजबूत
डिजिटल आधुनिकीकरण की इस योजना में कारागार विभाग को भी शामिल किया गया है। जेलों में डेस्कटॉप, बायोमेट्रिक अटेंडेंस डिवाइस, स्कैनर और वेबकैम जैसे तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।
इसके साथ ही 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट की खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और स्थापना का कार्य पूरा किया जा चुका है। इससे जेलों और न्यायालयों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा को मजबूती मिलेगी।
सरकार की इस पहल से पुलिस, फॉरेंसिक, अभियोजन, कारागार और न्यायालयों के बीच डिजिटल समन्वय को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। तकनीक आधारित इस व्यवस्था का लक्ष्य अपराध की जांच में तेजी लाने, साक्ष्यों के प्रबंधन को बेहतर बनाने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना है।
