ऊर्जा संकट के समाधान का मूलमंत्र: संयम, स्वदेशी और साझेदारी

The Guiding Principle for Resolving the Energy Crisis: Restraint, Self-Reliance, and Partnership
 
ऊर्जा संकट के समाधान का मूलमंत्र: संयम, स्वदेशी और साझेदारी

(मनोज कुमार अग्रवाल - विभूति फीचर्स)  वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ऊर्जा के संयमित उपयोग की अपील को लेखक ने समयानुकूल और दूरदर्शी कदम बताया है। प्रधानमंत्री की सात सूत्रीय अपील में न केवल संकट के समय नागरिकों का मनोबल बनाए रखने का संदेश है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का व्यावहारिक समाधान भी निहित है।

लेख में कहा गया है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के अवरुद्ध होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा और लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है। ऐसे कठिन समय में भारत सरकार ने कुशल प्रबंधन, कूटनीतिक सक्रियता और त्वरित रणनीतिक फैसलों के जरिए देश में ईंधन आपूर्ति को संतुलित बनाए रखा।

लेख के अनुसार, कई देशों जैसे स्पेन, मिस्र, जापान, बांग्लादेश और फिलीपींस में ईंधन राशनिंग, स्कूल बंदी और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं लागू करनी पड़ीं, लेकिन भारत में ऐसी नौबत नहीं आई। सरकार ने एलपीजी और प्राकृतिक गैस की घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन बढ़ाया और सार्वजनिक परिवहन तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त आवंटन सुनिश्चित किया।

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार ने अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और पश्चिम अफ्रीका जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तैयार किए। साथ ही पश्चिम एशियाई देशों विशेषकर सऊदी अरब, यूएई और ईरान के साथ लगातार संवाद बनाए रखे, जिससे भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही संभव हो सकी।

लेख में प्रधानमंत्री मोदी की अपीलों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नागरिकों को पेट्रोल-डीजल की खपत कम करनी चाहिए, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करना चाहिए तथा अनावश्यक विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचना चाहिए। लेखक के अनुसार, विदेशी मुद्रा बचाने और देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है।

लेख का निष्कर्ष है कि मौजूदा परिस्थितियों में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ऊर्जा और संसाधनों का संयमित उपयोग करे तथा सरकार के साथ मिलकर संकट का सामना करने में सहयोग दे। लेखक के मुताबिक, सकारात्मक सोच, राष्ट्रीय अनुशासन और सामूहिक सहभागिता ही देश को वैश्विक संकट से मजबूती के साथ बाहर निकाल सकती है।

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