गिरती लोन दरों का अगला दौर: उधार लेने वालों को क्या जानना चाहिए

The next round of falling loan rates: What borrowers need to know
 
गिरती लोन दरों का अगला दौर: उधार लेने वालों को क्या जानना चाहिए

आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंकबाज़ार :  भारत में लोन की दरें अब धीरे-धीरे नरमी की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन उधार लेने वालों को किसी बड़े या अचानक रेट-कट की उम्मीद फिलहाल नहीं करनी चाहिए। यह बदलाव भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के किसी आक्रामक मौद्रिक कदम का नतीजा नहीं है, बल्कि बैंकों की फंडिंग लागत में कमी और सिस्टम में बेहतर लिक्विडिटी की वजह से हो रहा है।

इस बदलाव का सबसे स्पष्ट असर डिपॉजिट साइड पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023–24 के दौरान बैंकों ने ऊँची ब्याज दरों पर जो डिपॉजिट जुटाए थे, वे अब मैच्योर हो रहे हैं। उनकी जगह अपेक्षाकृत कम दरों वाले नए डिपॉजिट आ रहे हैं। आरबीआई के आँकड़े भी इस रुझान की पुष्टि करते हैं—वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही से औसत टर्म डिपॉजिट दरों में नरमी देखी गई है। इसका सीधा फायदा यह है कि बैंक अपने मार्जिन पर ज़्यादा दबाव डाले बिना लोन की दरों में कटौती कर सकते हैं।

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हालांकि, रेट ट्रांसमिशन तेज़ नहीं होगा। बैंक एक साथ बड़ी कटौती करने के बजाय 10 से 25 बेसिस पॉइंट की छोटी और चरणबद्ध कटौतियों का रास्ता अपनाएंगे। इसका मतलब यह है कि पर्सनल लोन जैसे शॉर्ट-टर्म प्रोडक्ट्स में असर सीमित रह सकता है, जबकि होम लोन जैसे लंबी अवधि के लोन में इसका लाभ समय के साथ अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

सबसे पहले राहत फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलेगी। आज भारत में 60% से अधिक होम लोन फ्लोटिंग रेट पर हैं, जहाँ रेट रीसेट के ज़रिये या तो ईएमआई में कमी आएगी या लोन की अवधि घटेगी। वहीं, फिक्स्ड रेट पर लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए यह समय रीफाइनेंसिंग के विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने का हो सकता है।

महंगाई फिलहाल आरबीआई के तय दायरे में बनी हुई है, जो ब्याज दरों में इस नरमी को सहारा देती है। कुल मिलाकर तस्वीर साफ है—यह अचानक राहत का दौर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे मिलने वाले फायदे का चरण है। जो उधारकर्ता अपना क्रेडिट स्कोर मजबूत रखते हैं, बाज़ार के विकल्पों पर नज़र बनाए रखते हैं और सही समय पर निर्णय लेने के लिए तैयार रहते हैं, उन्हें इस बदलते ब्याज-दर माहौल में सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

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