UGC के हालिया निर्णय पर राष्ट्रीय युवा वाहिनी ने जताई आपत्ति , प्रधानमंत्री सहित भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
They have demanded immediate intervention from the Prime Minister and the top leadership of the BJP.
दिल्ली/लखनऊ। राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू देव प्रकाश शुक्ला जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एवं भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया निर्णय पर तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
प्रधानमंत्री को संबोधित एक स्मरण पत्र (Representation) में संगठन ने कहा है कि UGC का यह निर्णय देश की शिक्षा व्यवस्था में गंभीर असंतुलन और अन्याय को जन्म देने वाला है। यह न केवल योग्यता और समान अवसर की भावना के विपरीत है, बल्कि समाज में वैमनस्य एवं वर्गीय विभाजन को भी बढ़ावा दे सकता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू देव प्रकाश शुक्ला जी ने कहा, “हमारा विरोध किसी वर्ग के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि न्यायपूर्ण, संतुलित और योग्यता-आधारित शिक्षा व्यवस्था के पक्ष में है। यदि शिक्षा व्यवस्था असंतुलित होगी, तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी और भारत को वैदिक सनातन राष्ट्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।”
स्मरण पत्र में संगठन की ओर से निम्न प्रमुख मांगें रखी गई हैं—
1️⃣ UGC के विवादित निर्णय को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।
2️⃣ शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों एवं छात्र प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित कर निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।
3️⃣ शिक्षा नीति में योग्यता, समान अवसर और संवैधानिक न्याय की भावना को सुरक्षित रखा जाए।
संगठन ने चेताया कि यदि इस प्रकार के निर्णय सभी वर्गों की सहभागिता के बिना लागू किए गए, तो यह एकपक्षीय एवं अन्यायपूर्ण नीति बन जाएगी, जिससे देश की सामाजिक एकता और शिक्षा का स्तर दोनों प्रभावित होंगे।राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा नीति को राजनीतिक या जातीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
अध्यक्ष हिंदू देव प्रकाश शुक्ला जी ने आगे कहा,“भारत को वैदिक सनातन राष्ट्र बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था को समान, न्यायपूर्ण और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित करना होगा। शिक्षा में संतुलन के बिना हिंदू राष्ट्र की अवधारणा अधूरी है।”संगठन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि देश की शैक्षणिक समरसता, सामाजिक एकता और युवा पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखने हेतु इस विषय पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।
