जटिल हार्ट ब्लॉकेज के इलाज और दोबारा हार्ट अटैक की रोकथाम में आधुनिक तकनीक की भूमिका

Beyond Stents: The Role of Modern Technology in Treating Complex Heart Blockages and Preventing Recurrent Heart Attacks
 
 जटिल हार्ट ब्लॉकेज के इलाज और दोबारा हार्ट अटैक की रोकथाम में आधुनिक तकनीक की भूमिका

लखनऊ, 25 सितंबर 2026: कोरोनरी आर्टरी डिजीज को अब केवल धमनी में ब्लॉकेज और उसे खोलने के लिए स्टेंट लगाने तक सीमित नहीं माना जाता। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और कई कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज जैसी स्थितियों वाले मरीजों में उपचार को उनकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार तय करना जरूरी हो गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2022 में दुनियाभर में हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियों के कारण करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हुई। इनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़ी थीं।

हर ब्लॉकेज में केवल स्टेंट ही पर्याप्त नहीं

स्टेंटिंग ने कोरोनरी आर्टरी डिजीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन सभी ब्लॉकेज एक जैसे नहीं होते। कुछ मरीजों की धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम जमा होता है, तो कुछ में ब्लॉकेज लंबे और व्यापक होते हैं। कई मामलों में धमनी पूरी तरह बंद हो सकती है। इसके अलावा धमनी के विभाजन वाले हिस्से या हृदय की मुख्य कोरोनरी धमनी में मौजूद ब्लॉकेज उपचार को और जटिल बना सकते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में उपचार की योजना केवल स्टेंट लगाने के बजाय धमनी की संरचना, ब्लॉकेज की प्रकृति और रक्त प्रवाह पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है।डॉ. महिम सरन, डायरेक्टर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, मेदांता लखनऊ, ने बताया कि आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में जटिल ब्लॉकेज की सटीक पहचान और उपचार के लिए उन्नत इमेजिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रक्त वाहिका के भीतर की अल्ट्रासाउंड इमेजिंग और प्रकाश आधारित अत्यंत सूक्ष्म इमेजिंग तकनीक से धमनी के अंदर की स्थिति को विस्तार से समझने में मदद मिलती है। इससे ब्लॉकेज में मौजूद प्लाक, रक्त वाहिका के आकार और कैल्शियम की मात्रा का आकलन किया जा सकता है। स्टेंट लगाए जाने के बाद भी इन तकनीकों की मदद से यह देखा जा सकता है कि स्टेंट सही तरीके से खुला और धमनी की दीवार से ठीक तरह जुड़ा है या नहीं।

कैल्शियम वाले ब्लॉकेज में आधुनिक तकनीक

अत्यधिक कैल्शियम वाले ब्लॉकेज में स्टेंट को सही स्थान तक पहुंचाना और उसे पर्याप्त रूप से फैलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे मामलों में कैल्शियम को संशोधित करने के लिए विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

इनमें घूमने वाले उपकरणों की मदद से कैल्शियम को हटाने या संशोधित करने की तकनीक, ऑर्बिटल डिवाइस और इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य कठोर कैल्सिफाइड हिस्से को इस तरह तैयार करना होता है कि उपचार के दौरान स्टेंट को बेहतर तरीके से लगाया और फैलाया जा सके।

पूरी तरह बंद धमनी के इलाज में भी प्रगति

लंबे समय से पूरी तरह बंद कोरोनरी धमनी के मामलों को क्रॉनिक टोटल ऑक्लूजन (CTO) कहा जाता है। ऐसे मामलों में उपचार के लिए विशेष वायर, माइक्रोकैथेटर और अन्य उन्नत इंटरवेंशनल तकनीकों की जरूरत पड़ सकती है।इस तरह के उपचार का उद्देश्य केवल स्टेंट लगाना नहीं, बल्कि उपयुक्त मरीजों में जटिलताओं के जोखिम को ध्यान में रखते हुए रक्त प्रवाह को बहाल करना और लंबे समय तक उपचार के परिणामों को बेहतर बनाए रखना होता है।

हर दिखाई देने वाला ब्लॉकेज इलाज की मांग नहीं करता

आधुनिक हृदय चिकित्सा में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि डॉक्टर केवल एंजियोग्राफी में दिखाई देने वाले ब्लॉकेज की गंभीरता के आधार पर उपचार का निर्णय नहीं लेते। कुछ विशेष परीक्षण यह आकलन करने में मदद कर सकते हैं कि किसी संकुचन का वास्तव में हृदय की मांसपेशी तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।

इससे कुछ मरीजों में ऐसे इंटरवेंशन से बचने में मदद मिल सकती है जिसकी तत्काल आवश्यकता न हो। यानी उपचार का निर्णय ब्लॉकेज के आकार के साथ-साथ उसके वास्तविक कार्यात्मक प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

एंजियोप्लास्टी के बाद भी जारी रहनी चाहिए देखभाल

सफल एंजियोप्लास्टी या स्टेंटिंग कोरोनरी आर्टरी डिजीज के उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह बीमारी के मूल कारणों को पूरी तरह समाप्त नहीं करती। इसलिए उपचार के बाद जोखिम कारकों को नियंत्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मरीजों को अपने चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए। स्थिति के अनुसार इनमें रक्त के थक्के बनने से रोकने वाली दवाएं और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं शामिल हो सकती हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखना भी आवश्यक है।धूम्रपान छोड़ना, संतुलित और हृदय के लिए अनुकूल आहार लेना, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करना, वजन नियंत्रित रखना और पर्याप्त नींद लेना भी लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

दोबारा हार्ट अटैक से बचाव पर जोर

पहला हार्ट अटैक भविष्य में हृदय संबंधी जोखिमों को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी हो सकता है। इसलिए हार्ट अटैक के बाद की देखभाल केवल अस्पताल से छुट्टी मिलने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, हार्ट अटैक से उबर चुके मरीजों में दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम बना रहता है। ऐसे मरीजों के लिए दवाओं का नियमित सेवन, जोखिम कारकों का नियंत्रण और चिकित्सकीय फॉलो-अप महत्वपूर्ण हैं।

कार्डियक रिहैबिलिटेशन भी उपचार का अहम हिस्सा

हार्ट अटैक, कोरोनरी इंटरवेंशन या बाईपास सर्जरी के बाद उपयुक्त मरीजों के लिए कार्डियक रिहैबिलिटेशन रिकवरी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।2023 की अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की गाइडलाइन में उपयुक्त मरीजों को कार्डियक रिहैबिलिटेशन से जोड़ने की सिफारिश की गई है। इसमें नियंत्रित व्यायाम, जीवनशैली में बदलाव, जोखिम कारकों के प्रबंधन और मरीज की समग्र रिकवरी पर ध्यान दिया जाता है। ऐसे कार्यक्रम स्वास्थ्य संबंधी परिणामों को बेहतर करने और हृदय संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं।

आधुनिक हृदय चिकित्सा का लक्ष्य सिर्फ स्टेंट नहीं

आज की इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी का लक्ष्य केवल अधिक स्टेंट लगाना नहीं, बल्कि सही मरीज के लिए सही समय पर सही उपचार चुनना है। उन्नत इमेजिंग, कैल्शियम मॉडिफिकेशन तकनीक, जटिल ब्लॉकेज के उपचार और रक्त प्रवाह के आकलन जैसी सुविधाओं ने उपचार को अधिक व्यक्तिगत बनाने में मदद की है।

साथ ही, दवाओं, जीवनशैली में बदलाव, जोखिम कारकों के नियंत्रण और कार्डियक रिहैबिलिटेशन के माध्यम से भविष्य में होने वाली हृदय संबंधी घटनाओं के जोखिम को कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है।मरीजों के लिए संदेश यही है कि स्टेंट या एंजियोप्लास्टी उपचार का अंत नहीं, बल्कि हृदय की दीर्घकालिक देखभाल की एक कड़ी है। नियमित चिकित्सकीय निगरानी, निर्धारित दवाओं का पालन और स्वस्थ जीवनशैली हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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