पति-पत्नी के बीच तीसरे व्यक्ति की एंट्री से बदली कहानी
।
कहानी के अनुसार, प्रमोद सिंह एक सीधे-सादे और ईमानदार व्यक्ति थे। वह मेडिकल शॉप चलाते थे और ग्राहकों को उचित कीमत पर अच्छी दवाइयां उपलब्ध कराने की कोशिश करते थे। उनके व्यवहार और काम के प्रति ईमानदारी के कारण लोग उन पर भरोसा करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने आर्थिक स्थिति मजबूत की और दो-तीन प्लॉट भी खरीद लिए।
हालांकि, कामकाज में व्यस्त रहने के कारण प्रमोद अपनी पत्नी कल्पना को पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे। वह परिवार की जरूरतों और सुख-सुविधाओं को पूरा करने को ही अपने प्रेम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते थे, लेकिन वैवाहिक रिश्ते में साथ बिताए गए समय और भावनात्मक जुड़ाव की जरूरत शायद पीछे छूटती जा रही थी।
कहानी में कल्पना को आकर्षक व्यक्तित्व वाली महिला के रूप में दर्शाया गया है। बताया जाता है कि वह अपने वैवाहिक जीवन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी और उसे लगता था कि प्रमोद के साथ उसके विचारों और अपेक्षाओं का तालमेल नहीं बैठ पा रहा है।
इसी दौरान उसकी नजर पड़ोस में रहने वाले राजीव पर पड़ी। राजीव हाल ही में 12वीं पास करने के बाद नौकरी की तलाश में वहां आया था और एक कारखाने में काम करने की कोशिश कर रहा था। कहानी के मुताबिक, धीरे-धीरे कल्पना और राजीव के बीच बातचीत बढ़ने लगी और दोनों के बीच मेलजोल भी बढ़ गया।
बताया जाता है कि एक दिन कल्पना ने प्रमोद को सलाह दी कि काम का बोझ कम करने के लिए उन्हें दुकान पर किसी सहायक को रख लेना चाहिए। इसके लिए उसने राजीव का नाम सुझाया। प्रमोद को अपनी पत्नी की इस सलाह पर कोई संदेह नहीं हुआ और उसने राजीव को काम पर रखने के विचार पर भरोसा किया।
यहीं से कहानी में एक नया मोड़ आने की भूमिका तैयार होती है। हालांकि, आगे की घटनाओं और इसमें पंकज की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त जानकारी आवश्यक है।
