एस.आई.आर. के विरोध या चुनाव सुधारों पर उठ रहे सवालों का सच
The truth behind SIR's opposition or the questions being raised on electoral reforms
Sun, 23 Nov 2025
(डॉ. सुधाकर आशावादी – विनायक फीचर्स)
देश में लंबे समय से फर्जी मतदान, मतदाता सूची में त्रुटियाँ और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल लगातार आरोप लगाते रहे हैं। कभी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा जाता है, तो कभी प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा किया जाता है। इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध व अद्यतन करने की पहल शुरू की है। बिहार में सफल आयोजन के बाद यह अभियान अब कई राज्यों में चल रहा है।

एस.आई.आर. का मुख्य उद्देश्य है—
एक व्यक्ति – एक वोट की नीति को मजबूत करना
मृतक, पलायन कर चुके या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाना
वास्तविक, प्रामाणिक मतदाता सूची तैयार करना
लेकिन विडंबना यह है कि जो दल पहले चुनाव आयोग पर गड़बड़ी के आरोप लगाते थे, वही अब मतदाता सूची को ठीक करने की प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। कई स्थानों पर उनके कार्यकर्ता एस.आई.आर. के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि कुछ राजनीतिक तत्व चुनाव सुधारों के प्रति ईमानदार नहीं हैं।
अतीत की चुनौतियाँ और वर्तमान की पारदर्शिता
देश के दूरदराज क्षेत्रों में जब चुनाव मतपत्रों से होते थे, तब बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियाँ चोरी होने, मतपत्र छीनने और दबंग नेताओं की मनमानी जैसी घटनाएँ आम थीं। इन कारणों से आम मतदाता मतदान केंद्र तक पहुँच ही नहीं पाता था और चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी।
लेकिन आज—
मतदान पर्यवेक्षकों
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों
प्रशिक्षित कर्मचारियों
की देखरेख में पूरी चुनाव प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शिता के साथ सम्पन्न होती है। इसके बावजूद कुछ हार मान चुके राजनीतिक तत्व अपनी पराजय का ठीकरा चुनाव आयोग और कर्मचारियों पर फोड़ते रहते हैं।
मतदाता सूची की गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार?
यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है, तो इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी उस नागरिक की भी है। आम मतदाता ऐसा नहीं करता, लेकिन किसी संगठन से जुड़े लोग ऐसे प्रयास कर सकते हैं। यह चिंताजनक है कि जो दल फर्जी वोटिंग रोकने की बात करते हैं, वही एस.आई.आर. के माध्यम से मतदाता सूची के शुद्धिकरण का विरोध कर रहे हैं।
कुछ राजनीतिक दल यह आरोप भी लगाते हैं कि बी.एल.ओ. विपक्षी दलों के वोट काटते हैं। यह सोच न केवल संकीर्ण है बल्कि चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने का प्रयास भी है।
क्या कोई बी.एल.ओ. मतदाता सूची अपडेट करते समय यह पूछता है कि वह किस दल का समर्थक है?
क्या मतदान कर्मी मतदान के दिन मतदाता की राजनीतिक पसंद जानने का प्रयास करते हैं?
जब ऐसा नहीं होता, तो एस.आई.आर. पर संदेह पैदा करना केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश है।
