टेग करने वाले कभी डरते नही , जो डरते हैं वो टेग करते ही नहीं!
(मुकेश "कबीर" – विभूति फीचर्स)
आज के समय में फेसबुक पर “टेग करने वालों” से बच पाना किसी महासंग्राम से कम नहीं। आप चाहे एक महीने बाद भी लॉगिन करें, आपके नोटिफिकेशन में कई दर्जन टैग आपका इंतज़ार करते मिल जाएंगे और फिर दो ही विकल्प बचते हैं — या तो एक महीने तक सब टेग देखिए या फिर खिड़की बंद कर दीजिए।
पहले ज़माने में लोग दिवाली पर अपने घरों की दीवारें गोबर मिट्टी से लीपकर चमकाते थे और अगले ही दिन कोई छुटभैया नेता वहाँ प्रचार का पोस्टर चिपका देता था। आज वही स्थिति फेसबुक की वॉल की है। जैसे उस समय उन पोस्टरों को हटाने का उपाय नहीं था, वैसे ही आज इन टेगरों को कंट्रोल करने वाला कोई “फेसबुक का शेषन” मौजूद नहीं!
टेग करने वाले अपनी वॉल पर पोस्ट डालें या नहीं, दूसरों की वॉल जरूर भरते रहेंगे। जैसे किसी ने इन्हें टार्गेट दे रखा हो — जितना ज्यादा टैग, उतना ज्यादा Increment!आप ब्लॉक कर दें, हाइड कर दें, अनफ्रेंड कर दें — ये किसी न किसी रास्ते फिर प्रकट हो ही जाएंगे। इन्हें कोई डर नहीं। इन्हें न फटकार का डर, न अनफ्रेंड होने का। ये नए फ्रेंड जोड़ते रहेंगे और नई वॉल्स पर अपनी पोस्ट चिपकाते रहेंगे।
इनकी एक और खास आदत — इन्हें कोई उपलब्धि मिली हो तो दो बार टैग करेंगे। जैसे पहली बार किसी ने नोटिस ही नहीं किया हो इसलिए तुरन्त “सेकंड राउंड फायर”! इनके आत्मविश्वास को देखकर तो बड़े से बड़ा नेता भी शर्मिंदा हो जाए। और सच पूछिए तो इन टेगरों का कोई इलाज नहीं। बस सावधानी ही सुरक्षा है। बिल्कुल उसी तरह जैसे पार्क में जाने वाले कपल्स मच्छरों को एडजस्ट कर लेते हैं… क्योंकि मच्छर तो बदलने वाले नहीं!
इसलिए फेसबुक चलाना है तो टेग करने वालों को जीवन के हिस्से की तरह स्वीकार कर लीजिए। आखिर —
“टेग करने वाले कभी डरते नहीं… और जो डरते हैं, वो टेग ही नहीं करते!”
अगर ये व्यंग्य आपको अच्छा लगे…
तो इसे अपनी वॉल पर डालिए, और हाँ… चाहें तो दो-चार लोगों को टैग भी कर दीजिए
