एक कुंतल फूलों की पुष्पवर्षा से सराबोर हुआ पंडाल, ‘राधा रमण हरि बोल’ पर झूमे हजारों भक्त
लखनऊ। ऐशबाग स्थित डी.ए.वी. कॉलेज, पं. रास बिहारी तिवारी मार्ग में चल रही श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में कथा पंडाल में एक कुंतल फूलों की पुष्पवर्षा की गई। फूलों की बारिश होते ही पूरा पंडाल ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘जय जय राधा रमण हरि बोल’ के जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु संकीर्तन में झूमते नजर आए और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा का शुभारंभ “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥” के मंत्रोच्चार से हुआ। इसके बाद जैसे ही ‘जय जय राधा रमण हरि बोल’ का संकीर्तन शुरू हुआ, श्रद्धालु हाथ उठाकर भक्ति में लीन हो गए।
भक्ति जीवन को देती है सार्थकता : पुंडरीक गोस्वामी
कथा व्यास परम पूज्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में अध्यात्म को विभिन्न रूपों में स्वीकार किया गया है, लेकिन भारतीय परंपरा में संस्कार, परिवार और रिश्तों को विशेष स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कर्तव्य और पारिवारिक संबंधों की महत्ता हमेशा रही है।
उन्होंने भगवान श्रीराम और विभीषण से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीराम ने विभीषण से रावण का अंतिम संस्कार कराया। यह प्रसंग भारतीय संस्कृति में संस्कार और कर्तव्य के महत्व को दर्शाता है।श्री पुंडरीक गोस्वामी ने भक्ति की तुलना भोजन में नमक से करते हुए कहा कि जिस तरह नमक भोजन के स्वाद को बढ़ाता है, उसी प्रकार भक्ति मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाती है। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति अपनाने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। जीवन के किसी भी पड़ाव पर व्यक्ति भगवान की शरण ग्रहण कर सकता है।
उन्होंने कहा कि जब भक्त के मन में यह विश्वास मजबूत होने लगता है कि “भगवान श्रीकृष्ण ही सब कुछ कर देंगे”, तब उसकी भक्ति और दृढ़ होती है और चिंताएं कम होने लगती हैं।कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। वृंदावन में नंदबाबा, यशोदा मैया और बलराम जी के वात्सल्य में पले श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
गुब्बारों, फलों और रंगोली से सजा कथा पंडाल
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए कथा पंडाल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। गुब्बारों, फलों और रंगोली से सजे पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उत्साह देखते ही बन रहा था। जन्मोत्सव के अवसर पर एक कुंतल फूलों की पुष्पवर्षा की गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने जमकर जयकारे लगाए।
आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। उन्होंने कहा कि कथा में बड़ी संख्या में भक्त परिवार सहित पहुंचे और श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर भक्तिरस का आनंद लिया।कार्यक्रम में अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, समीर मित्तल, नवीन गुप्ता, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी, शिवम अग्रवाल, आरएन सिंह, सुनील कुमार मिश्रा, मनोज राय, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला और साकेत शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कथा स्थल पर सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने पंडाल की व्यवस्थाओं के साथ यातायात को सुचारु बनाए रखने में सहयोग किया। अंत में आयोजक अमरनाथ मिश्र ने कथा में शामिल सभी श्रद्धालुओं, यजमानों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
