तीन पहिए, एक क्रांति: भारत के ईवी विकास को 'पावर' दे रही है ट्रॉनटेक की बैटरी तकनीक; 5 लाख ई-रिक्शा की बनी पसंद
लखनऊ | 27 मार्च 2026 भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility) की असली कहानी केवल लग्जरी कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें उन लाखों ई-रिक्शा में हैं जो देश के परिवहन की 'लास्ट-माइल' कनेक्टिविटी को मजबूत कर रहे हैं। वर्तमान में भारत की सड़कों पर 18.1 लाख से अधिक पंजीकृत ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं, जो इसे देश का सबसे बड़ा और सफल इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट बनाते हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी शक्ति बैटरी टेक्नोलॉजी है, जिसमें ट्रॉनटेक (Trontek) एक प्रमुख नाम बनकर उभरा है।
ई-रिक्शा: भारतीय परिवहन का मजबूत आधार
महानगरों के व्यस्त बाजारों से लेकर छोटे कस्बों तक, ई-रिक्शा आज आम आदमी की पहली पसंद बन चुके हैं। किफायती संचालन लागत और भारतीय सड़कों के अनुकूल डिजाइन ने इसे व्यावहारिक स्तर पर स्वीकार्य बनाया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2025 तक इस क्षेत्र का बाजार लगभग 1.55 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
ट्रॉनटेक (Trontek): 5 लाख ई-रिक्शा को दी नई ऊर्जा
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के इस ईकोसिस्टम में ट्रॉनटेक एक गेम-चेंजर की भूमिका निभा रहा है। पिछले एक दशक में कंपनी ने:
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देशभर में 5 लाख से अधिक ई-रिक्शा के संचालन को अपनी बैटरी तकनीक से समर्थन दिया है।
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दिल्ली/एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में मजबूत पैठ बनाई है।
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हर साल 2 लाख से अधिक बैटरी पैक तैनात किए जा रहे हैं और कंपनी 200 से अधिक ओईएम (OEM) के साथ साझेदारी कर रही है।
लिथियम तकनीक: लेड-एसिड के मुकाबले 6 गुना ज्यादा लाइफ
ट्रॉनटेक की लिथियम बैटरियां तकनीक के मामले में पारंपरिक लेड-एसिड बैटरियों से कहीं आगे हैं। जहाँ पुरानी लेड-एसिड बैटरियां केवल 500 चार्जिंग साइकल देती थीं, वहीं ट्रॉनटेक की लिथियम बैटरियां 3000 से अधिक चार्जिंग साइकल प्रदान करती हैं। इससे बैटरी की उम्र बढ़ती है और ड्राइवरों को बार-बार बैटरी बदलने के खर्च से मुक्ति मिलती है। ई-रिक्शा चालकों के लिए बैटरी केवल एक पुर्जा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का आधार है। बेहतर बैटरी जीवन और सुरक्षा सीधे उनकी आय और कार्यक्षमता को बढ़ाती है।" > — श्री समरथ एस कोचर, संस्थापक और सीईओ, ट्रॉनटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड
आर्थिक अवसर और रोजगार का सृजन
ई-रिक्शा ईकोसिस्टम ने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खोले हैं। स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में बढ़ते भारत के लिए यह सेगमेंट भविष्य में और भी महत्वपूर्ण होने वाला है, जिसमें ट्रॉनटेक जैसी कंपनियां अपनी उन्नत तकनीक से योगदान दे रही हैं।
ट्रॉनटेक के बारे में एक नजर में:
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स्थापना: 2004
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अनुभव: 4 लाख ई-रिक्शा और 6 लाख ई-टू-व्हीलर्स को दी ऊर्जा।
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उत्पाद: Li-EV बैटरी, IP67 रेटेड चार्जर और ऊर्जा भंडारण समाधान।
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विजन: उन्नत लिथियम-आयन तकनीक के जरिए भारत को प्रदूषण मुक्त बनाना।
