अथक परिश्रम और राष्ट्रभक्ति, भारतीय जेन-जी की असली पहचान
(डॉ. सुदीप शुक्ल – विभूति फीचर्स)
भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है। आधी से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत का भविष्य युवा पीढ़ी की ऊर्जा, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति पर टिका है। यही कारण है कि भारत को “यंग इंडिया” और “डेमोग्राफिक डिविडेंड” के नाम से जाना जाता है। आज पूरी दुनिया भारतीय युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और नवाचार क्षमता की सराहना कर रही है।
पड़ोसी देशों से अलग भारत का युवा
हाल ही में बांग्लादेश, नेपाल और कुछ अन्य देशों में युवाओं, खासकर जेन-जी वर्ग में असंतोष की लहरें उठीं। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अवसरों की कमी ने वहाँ के युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया। इसके उलट, भारतीय युवा विद्रोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और रचनात्मक मार्ग से बदलाव में विश्वास रखते हैं। वे जानते हैं कि राष्ट्र निर्माण का रास्ता संघर्ष और हिंसा से नहीं, बल्कि नवाचार और मेहनत से बनता है।
हर क्षेत्र में भारतीय युवा का योगदान
भारतीय जेन-जी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी, व्यापार, कला, खेल और सेना – हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है।
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विज्ञान और तकनीक: इसरो की सफलताओं में युवा वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका है।
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आईटी और स्टार्टअप्स: भारतीय युवा आज वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं और स्टार्ट-अप्स को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा रहे हैं।
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व्यापार और उद्योग: वे केवल नौकरी तक सीमित नहीं, बल्कि नए रोजगार अवसर पैदा कर रहे हैं।
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खेल और कला: खेलों में पदक जीतकर और साहित्य, लेखन व कला में योगदान देकर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
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सुरक्षा और सेना: सीमाओं की रक्षा के लिए युवाओं का समर्पण और त्याग ही राष्ट्र की शक्ति है।
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राजनीति: नई सोच और दृष्टिकोण के साथ लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं।
राष्ट्र के प्रति आस्था
भारतीय युवा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में गहरा विश्वास रखते हैं। वे जानते हैं कि असंतोष हो तो भी अभिव्यक्ति का मार्ग लोकतांत्रिक होना चाहिए। यही वजह है कि वे किसी भी उकसावे या भ्रामक प्रयास से प्रभावित नहीं होते।
कोरोना महामारी इसका बड़ा उदाहरण है। उस समय युवाओं ने राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक सेवा और सहयोग का जो उदाहरण भारत के युवाओं ने पेश किया, वह दुनिया में दुर्लभ था।
वैश्विक सोच, भारतीय जड़ें
आज की पीढ़ी वैश्विक नजरिया रखती है, लेकिन उसकी जड़ें भारतीय संस्कृति और मूल्यों में गहराई से जुड़ी हैं। वे इंटरनेट और नई तकनीकों से भले ही जुड़े हों, पर जानते हैं कि उनका पहला कर्तव्य अपने देश के प्रति है। जब कोई भी शक्ति उन्हें राष्ट्र-विरोधी विचारों की ओर मोड़ने का प्रयास करती है, तो वे डटकर उसका विरोध करते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा का सम्मान
भारत का युवा अब केवल सपनों तक सीमित नहीं है। उसका लक्ष्य व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर भारत को विश्वगुरु बनाने का है। इसलिए आवश्यक है कि समाज और नेतृत्व दोनों इस ऊर्जा का सम्मान करें और उसे सकारात्मक अवसर प्रदान करें।
